क्या अब 'सुशासन बाबू' की धूप ढलने वाली है और केसरिया परचम लहराने की तैयारी है?
बिहार में नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से BJP का सीएम फिक्स? 2000 का पुराना दर्द भरने अमित शाह फ्रंटफुट पर
बिहार की सियासत में बड़ा उलटफेर की अटकलें तेज हैं, जहां नीतीश कुमार के रिटायरमेंट और बीजेपी के सीएम बनने की चर्चा जोरों पर है। 26 साल पुराने जख्म भरने की कोशिश में NDA नया फॉर्मूला आजमा रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
2000 में बीजेपी के पास ज्यादा विधायक होने के बावजूद नीतीश कुमार को सीएम बनाया गया, जिससे पार्टी 'कैडर पार्टी' बनकर रह गई। अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के फैसले ने बीजेपी को छोटे भाई की भूमिका दी। अब 26 साल बाद अमित शाह इस गलती न दोहराने पर अड़े हैं।

नया फॉर्मूला:
बीजेपी का सीएम + जेडीयू के 2 डिप्टी सीएम का प्रस्ताव चल रहा है, जिसमें निशांत कुमार डिप्टी बन सकते हैं। जेडीयू चाहती है नीतीश सीएम रहें और बीजेपी को 2 डिप्टी, लेकिन बीजेपी फ्रंटफुट पर है। इससे बीजेपी को स्वतंत्र पहचान मिलेगी और नीतीश राज्यसभा जा सकेंगे।
प्रमुख चेहरे:
बीजेपी में सम्राट चौधरी सीएम रेस के मजबूत दावेदार हैं, जो पहले डिप्टी रह चुके हैं। निशांत कुमार की 'सॉफ्ट लॉन्चिंग' डिप्टी के रूप में जेडीयू की विरासत बचाएगी। अंतिम फैसला अमित शाह लेंगे।

विपक्ष का दावा:
तेजस्वी यादव का RJD 25 सीटों के साथ जेडीयू-कांग्रेस से गठजोड़ का दावा कर रहा है, लेकिन अमित शाह की मौजूदगी से संभावना कम। महागठबंधन राज्यसभा सीटों पर जोड़-तोड़ की कोशिश में है।
भविष्य की संभावनाएं:
नीतीश के राज्यसभा जाने से अप्रैल में नई सरकार बनेगी, जेडीयू का BJP में 'वर्किंग मर्जर' हो सकता है। बिहार को युवा चेहरा मिलेगा या केसरिया रंग चढ़ेगा, ये NDA की रणनीति तय करेगी।

