“खबर का असर”: DGP कैलाश मकवाणा ने पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य और मानवीय पहलुओं पर लिया बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश पुलिस में ट्रांसफर नीति और छोटे कर्मचारियों पर नियमों के सख्त पालन को लेकर उठे सवालों के बीच अब पुलिस मुख्यालय ने पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य और मानवीय पहलुओं पर बड़ा निर्णय लिया है।

“खबर का असर”: DGP कैलाश मकवाणा ने पुलिसकर्मियों के स्वास्थ्य और मानवीय पहलुओं पर लिया बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश पुलिस के मुखिया डीजीपी कैलाश मकवाणा की अध्यक्षता में आयोजित पुलिस स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PHPS) न्यासी मंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। बैठक में गंभीर बीमारियों, हार्ट अटैक, सड़क दुर्घटना, ड्यूटी के दौरान घायल पुलिसकर्मियों, कैंसर, किडनी-लीवर ट्रांसप्लांट और ओपन हार्ट सर्जरी जैसे मामलों में अधिकतम 14 लाख तक सहायता देने का निर्णय लिया गया।

दरअसल, हाल ही में “पब्लिक वाणी” के यूट्यूब प्लेटफॉर्म पर प्रसारित “खरी-खरी” कार्यक्रम में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था कि पुलिस विभाग में ट्रांसफर और पोस्टिंग के नियम केवल आरक्षक से लेकर सब इंस्पेक्टर स्तर तक ही लागू होते दिखाई देते हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारियों पर समान नियम लागू नहीं होते। कार्यक्रम में यह भी कहा गया था कि छोटे कर्मचारियों की समस्याओं, स्वास्थ्य, परिवार और मानवीय परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।

इसी बीच डीजीपी कैलाश मकवाणा ने भी बैठक में कहा कि पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे नागरिकों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्य करते हैं, इसलिए उनके स्वास्थ्य और परिवार की सुरक्षा पुलिस संगठन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

कैशलेस इलाज की सुविधा बढ़ेगी

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि प्रदेश में अधिक निजी अस्पतालों को योजना से जोड़ा जाएगा ताकि पुलिसकर्मियों को अपने जिले या नजदीकी क्षेत्र में कैशलेस उपचार की सुविधा मिल सके। वर्तमान में प्रदेश के भीतर 55 और प्रदेश के बाहर 4 निजी अस्पताल योजना से जुड़े हुए हैं।

गैर-अनुबंधित अस्पतालों में भी मिलेगा इलाज

डीजीपी ने यह भी निर्णय लिया कि यदि किसी पुलिसकर्मी को हार्ट अटैक या गंभीर सड़क दुर्घटना जैसी स्थिति में गैर-अनुबंधित अस्पताल में भर्ती कराना पड़े तो मरीज की स्थिति स्थिर होने तक कैशलेस इलाज की सुविधा दी जाएगी।

मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर

बैठक में स्वास्थ्य सुरक्षा योजना को अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक बनाने पर जोर दिया गया। अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त कर्मचारियों के आश्रित छोटे भाई-बहनों और दिव्यांगजनों को भी योजना का लाभ देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजने का निर्णय लिया गया।

“सिर्फ छोटे कर्मचारियों पर नियम क्यों?”

“खरी-खरी” कार्यक्रम में यह सवाल भी उठाया गया था कि अगर आरक्षक और सब इंस्पेक्टर स्तर पर ट्रांसफर और पोस्टिंग की सीमा तय की जा सकती है, तो फिर वर्षों से एक ही जिलों में जमे वरिष्ठ अधिकारियों पर समान नियम क्यों लागू नहीं होते। कार्यक्रम में इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर, मंदसौर और सिंगरौली जैसे जिलों का उल्लेख करते हुए वरिष्ठ अधिकारियों की लंबी पोस्टिंग पर सवाल उठाए गए थे।