बीफ विवाद में नया मोड़: महिला की गिरफ्तारी के बाद मुस्लिम नेताओं ने भी जताई नाराजगी
गुरुग्राम में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली पश्चिम बंगाल की महिला ज्योत्सना बीबी को एक विवादित वीडियो के मामले में गिरफ्तार किया गया है। महिला पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है और फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में है।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को लेकर सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो पोस्ट करने का विवाद अब और गहरा गया है। गुरुग्राम में घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली पश्चिम बंगाल की एक महिला को धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अब इस पूरे मामले पर पश्चिम बंगाल के मुस्लिम समुदाय के कई प्रमुख कूटनीतिक और धार्मिक नेताओं ने भी महिला के इस कृत्य की कड़ी आलोचना की है।
क्या है पूरा मामला..
पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले की रहने वाली ज्योत्सना बीबी वर्तमान में गुरुग्राम के सेक्टर-29 थाना क्षेत्र के चकरपुर इलाके में रहती है। आरोप है कि उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें उसने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को संबोधित करते हुए कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की और बीफ पकाने का दावा किया। वीडियो के वायरल होने के बाद दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर गुरुग्राम पुलिस ने 30 मई 2026 को महिला को गिरफ्तार कर लिया था।
अदालत ने खारिज की जमानत याचिका, 8 जून को अगली सुनवाई..
गिरफ्तारी के बाद आरोपी महिला को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।
- जमानत नामंजूर: स्थानीय अदालत में महिला की जमानत अर्जी पर सुनवाई हुई, लेकिन कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मंगलवार को जमानत याचिका खारिज कर दी।
- अगली सुनवाई: इस मामले की अगली कानूनी सुनवाई अब 8 जून 2026 को निर्धारित की गई है।
- फोरेंसिक जांच: जांच के दौरान गुरुग्राम पुलिस ने महिला का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और वीडियो की सत्यता की पुष्टि के लिए उसे फॉरेंसिक लैब (FSL) भेजा गया है।
मुस्लिम नेताओं ने की आलोचना: 'यह सिर्फ सुर्खियां बटोरने का जरिया'..
इस विवादित वीडियो पर मुस्लिम समुदाय के बड़े चेहरों ने स्पष्ट रुख अपनाते हुए महिला के कृत्य को गलत ठहराया है:
मस्जिद के इमाम का बयान..
कोलकाता की प्रसिद्ध नाखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक क़ासमी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "हम ऐसे किसी भी कार्य का समर्थन नहीं करते जो किसी दूसरे समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाए। इस तरह के कदम बिल्कुल उचित नहीं हैं और कानून को इस मामले में अपना काम पूरी निष्पक्षता से करना चाहिए।"
वक्फ एस्टेट का रुख..
मैसूर फैमिली फातेहा फंड वक्फ एस्टेट के सचिव मोहम्मद शहीद आलम ने भी महिला की आलोचना करते हुए कहा कि यह सब सिर्फ चर्चा में आने और सुर्खियां बटोरने की कोशिश प्रतीत होती है। किसी अनजान व्यक्ति या राजनीतिक नेता के संदर्भ में ऐसा दावा करना पूरी तरह गलत है। यदि कोई नाराजगी थी, तो उसे व्यक्त करने के अन्य संवैधानिक तरीके मौजूद हैं।
'कुर्बानी' की अनुमति न मिलने का भी दावा..
पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार, वीडियो में महिला ने कथित तौर पर यह भी कहा था कि उसे कुर्बानी करने की अनुमति नहीं दी गई थी, जिससे नाराज होकर उसने यह आपत्तिजनक वीडियो बनाया। फिलहाल, पुलिस फोरेंसिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है, जबकि सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी इस पर तीखी बहस जारी है।

