AIADMK में बड़ी बगावत, 30 से ज्यादा विधायक CM विजय की TVK सरकार के समर्थन में आए
AIADMK के सीनियर नेता सीवी शनमुगम वाले गुट ने थलपति विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) को समर्थन दे दिया है. उन्होंने यह भी साफ किया कि AIADMK किसी भी अलायंस का हिस्सा नहीं है, यानी पार्टी का BJP से कोई रिश्ता नहीं है.
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल आ गया है. ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIADMK) अब खुलकर दो गुटों में बंटती नजर आ रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता सीवी शन्मुगम के नेतृत्व वाले गुट ने मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) सरकार को समर्थन देने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है. बताया जा रहा है कि इस गुट के साथ 30 से ज्यादा विधायक हैं.
यह घटनाक्रम तमिलनाडु विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट से ठीक पहले सामने आया है. मुख्यमंत्री विजय को 13 मई को विधानसभा में बहुमत साबित करना है. ऐसे में AIADMK के बागी विधायकों का समर्थन विजय सरकार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.
“जनता ने विजय को जनादेश दिया”
मंगलवार सुबह मीडिया से बातचीत में सीवी शन्मुगम ने कहा कि उनकी पार्टी जनता के जनादेश का सम्मान कर रही है. उन्होंने कहा, जनता ने विजय को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है. हम मुख्यमंत्री विजय को बधाई देते हैं और TVK सरकार को समर्थन देते हैं.
शन्मुगम ने यह भी साफ किया कि उनका उद्देश्य AIADMK को तोड़ना नहीं है. उन्होंने कहा कि अगर पार्टी DMK के साथ गठबंधन करती तो उसका अस्तित्व खत्म हो जाता.
AIADMK में खुलकर सामने आई गुटबाजी
2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK को सिर्फ 47 सीटें मिली थीं. चुनावी हार के बाद से पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ता जा रहा था. अब पार्टी के अधिकांश विधायक दो अलग-अलग गुटों में बंट चुके हैं.
सोमवार को तमिलनाडु विधानसभा के पहले सत्र में भी यह मतभेद साफ दिखाई दिया. एक गुट एडप्पडी के. पलानीस्वामी (EPS) के साथ पहुंचा, जबकि दूसरा गुट अलग से विधानसभा पहुंचा. बाद में शन्मुगम गुट ने प्रोटेम स्पीकर को पत्र देकर एस.पी. वेलुमणि को विधायक दल का नेता घोषित करने की मांग की.
TVK सरकार को मिलेगा मजबूत समर्थन
तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) 108 सीटों के साथ राज्य की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के लिए उसे 118 सीटों की जरूरत थी. कांग्रेस, CPI, CPI(M), IUML और VCK जैसे सहयोगी दलों का समर्थन पहले से सरकार के साथ है. अब AIADMK के बागी विधायकों के समर्थन से विजय सरकार की स्थिति और मजबूत हो गई है.
EPS के नेतृत्व पर उठे सवाल
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार चुनावी हार के बाद एडप्पडी पलानीस्वामी के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं. कई विधायक मानते हैं कि EPS अब पार्टी को जीत दिलाने में सक्षम नहीं हैं. यही वजह है कि बड़ी संख्या में विधायक तेजी से उभर रही TVK के साथ जाने को तैयार हो गए.
विश्लेषकों का कहना है कि अगर AIADMK में यह टूट औपचारिक रूप लेती है तो तमिलनाडु की पारंपरिक DMK-AIADMK राजनीति पूरी तरह बदल सकती है और इसका सबसे बड़ा फायदा TVK को मिल सकता है.
shivendra 
