बंगाल में ‘कट मनी’ की वापसी! TMC नेताओं ने लौटाए पैसे
पश्चिम बंगाल में कथित ‘कट मनी’ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। कई TMC नेताओं के ग्रामीणों को पैसे लौटाने के वीडियो सामने आए हैं। आरोप है कि सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के बदले लाभार्थियों से कमीशन वसूला गया था। वहीं नादिया जिले में महिलाओं की लक्ष्मीर भंडार योजना की सूची में 173 पुरुषों के नाम मिलने से नया विवाद खड़ा हो गया है।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्ता परिवर्तन होते ही जमीनी हालात तेजी से बदलने लगे हैं। राज्य में भाजपा की सरकार बनने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय नेताओं में कानूनी कार्रवाई का डर साफ देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें टीएमसी के नेता ग्रामीणों से हाथ जोड़कर माफी मांग रहे हैं और सरकारी योजनाओं के बदले लिया गया कमीशन (कट-मनी) वापस कर रहे हैं।
भाजपा के आईटी सेल चीफ अमित मालवीय ने भी अपने 'X' हैंडल पर ऐसे दो वीडियो शेयर कर टीएमसी पर तीखा हमला बोला है।
Amid a string of corruption-related arrests of TMC leaders, panic appears to be setting in at the grassroots level.
— Amit Malviya (@amitmalviya) June 2, 2026
After Kakdwip, it is Namkhana.
In Namkhana, South 24 Parganas, a local TMC leader was seen returning cash to residents after allegations emerged that ₹5,000 had… pic.twitter.com/tpRUzO3UKZ
5-5 हजार रुपए लौटाकर पंचायत सदस्य ने मांगी माफी..
अमित मालवीय द्वारा साझा किए गए वीडियो के मुताबिक, दक्षिण 24 परगना के नामखाना (शिबरामपुर) में स्थानीय टीएमसी नेता और ग्राम पंचायत सदस्य माधव चंद्र लाया ने ग्रामीणों को उनके पैसे लौटाए। माधव चंद्र पर आरोप था कि उसने 'PM आवास योजना' के तहत घर दिलाने के बदले 45 लाभार्थियों में से प्रत्येक से ₹5,000 की वसूली की थी।
पैसे लौटाने के बाद माधव चंद्र लाया ने कैमरे पर दावा किया- मैंने बिना किसी दबाव के खुद ही ग्रामीणों के ₹2.25 लाख लौटाए हैं। यह पैसा हमसे पार्टी के सीनियर लीडर्स और पंचायत अधिकारियों के दबाव में लिवाया गया था। इसी तरह की एक तस्वीर कूचबिहार के फकीरेर कुठी से भी सामने आई है, जहां पचगढ़ ग्राम पंचायत के बूथ अध्यक्ष तपन डे ग्रामीणों को उनके पैसे लौटाते नजर आए।
नादिया में बड़ा फर्जीवाड़ा: महिलाओं की योजना में 173 पुरुषों के नाम..
पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार का एक और हैरान करने वाला मामला नादिया जिले के धुबुलिया से सामने आया है। यहां सिर्फ महिलाओं के लिए चलाई जा रही 'लक्ष्मीर भंडार योजना' के लाभार्थियों की लिस्ट में 173 पुरुषों के नाम मिले हैं। इतना ही नहीं, फरवरी 2026 से लेकर अब तक इन फर्जी खातों के जरिए सरकारी पैसे भी निकाले जा चुके हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई..
नादिया के जिलाधिकारी श्रीकांत पल्ली ने बताया कि मामला सामने आते ही जांच शुरू कर दी गई है और सभी 173 पुरुषों के नाम लिस्ट से हटा दिए गए हैं।
30 लाख फर्जी लाभार्थी का दावा..
इस बीच, पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि राज्य में लक्ष्मीर भंडार योजना के करीब 2.2 करोड़ लाभार्थियों में से लगभग 30 लाख लाभार्थी पूरी तरह फर्जी हो सकते हैं। उन्होंने इस महा-फर्जीवाड़े की SIT जांच और मनी लॉन्ड्रिंग (ED जांच) एंगल से पड़ताल कराने की बात कही है।
भ्रष्टाचार पर कसता शिकंजा..
उपप्रधान गिरफ्तार, जांच के लिए आयोग गठित
मुर्शिदाबाद में गिरफ्तारी..
मुर्शिदाबाद के नूतनग्राम में 'बांग्लार आवास योजना' के तहत घर दिलाने के नाम पर ₹5,000 से ₹15,000 तक की रिश्वत लेने के आरोप में ग्राम उपप्रधान सिराजुल शेख को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
रिटायर्ड जज की अगुवाई में कमीशन..
राज्य सरकार ने सरकारी फंड के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए 'इंस्टिट्यूशनल कमीशन' का गठन किया है। इस आयोग की अध्यक्षता रिटायर्ड जज विश्वजीत बसु करेंगे, जहां पीड़ित ग्रामीण सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे।
क्या है 'कट-मनी' विवाद, जिसे ममता बनर्जी ने भी माना था..
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'कट-मनी' का मतलब सरकारी योजनाओं (जैसे- आवास योजना, मनरेगा, सड़कें) का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के बदले स्थानीय नेताओं द्वारा वसूला जाने वाला अवैध कमीशन है।
दिलचस्प बात यह है कि 18 जून 2019 को नदिया जिले की एक बैठक में खुद ममता बनर्जी ने सार्वजनिक मंच से अपने कार्यकर्ताओं को डांटते हुए कहा था, "यदि किसी ने लोगों से कट-मनी ली है, तो उसे तुरंत वापस कर दें।" उस बयान के बाद पूरे बंगाल में टीएमसी नेताओं के घरों के बाहर पैसे वापसी के लिए लाइनें लग गई थीं। अब, 2026 में सत्ता बदलने के बाद भाजपा ने इस पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
TMC ने झाड़ा पल्ला..
इस पूरे विवाद पर कूचबिहार जिले के टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि पार्टी का किसी भी तरह की अवैध वसूली से कोई लेना-देना नहीं है। अगर किसी नेता ने व्यक्तिगत रूप से पैसे लिए हैं, तो वह खुद इसका जिम्मेदार होगा, पार्टी ऐसे कृत्यों का समर्थन नहीं करती।

