हीटवेव का कहर: भारत में रोज 3400 अतिरिक्त मौतों का दावा, रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
भारत में बढ़ती गर्मी और हीटवेव अब गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले रही है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में भीषण गर्मी के कारण प्रतिदिन करीब 3400 अतिरिक्त मौतें हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हीटवेव से जुड़ी अधिकांश मौतें आधिकारिक रिकॉर्ड में हार्ट अटैक, सांस की तकलीफ या अन्य कारणों के रूप में दर्ज होती हैं, जिससे वास्तविक आंकड़े सामने नहीं आ पाते।
साल 2026 की गर्मी ने आम जनजीवन को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। देश के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है। लेकिन इससे भी ज्यादा हैरान और डराने वाली बात वो छिपे हुए आंकड़े हैं, जो अमूमन सरकारी रिकॉर्ड्स में सामने नहीं आते। एक हालिया रिसर्च के मुताबिक, इस साल भारत में हीटवेव (लू) इतनी खतरनाक साबित हो रही है कि इसकी वजह से हर दिन करीब 3,400 लोगों की मौत हो रही है। यानी रोजाना होने वाली सामान्य मौतों के आंकड़ों में 3 हजार से ज्यादा अतिरिक्त मौतें सिर्फ भीषण गर्मी के कारण जुड़ गई हैं।
रिकॉर्ड में 'हार्ट अटैक' और 'सांस की बीमारी', लेकिन असली कातिल 'गर्मी'
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा मौतों के रजिस्ट्रेशन को लेकर हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, हीटस्ट्रोक या लू से होने वाली मौतों के सरकारी आंकड़े अक्सर बेहद कम दिखाई देते हैं। इसकी वजह यह है कि सिस्टम में इन मौतों का प्राथमिक कारण 'हीटवेव' दर्ज ही नहीं किया जाता।जब कोई व्यक्ति अत्यधिक गर्मी के कारण दम तोड़ता है, तो अस्पताल या सरकारी रिकॉर्ड में उसकी मौत की वजह हार्ट अटैक (दिल का दौरा), स्ट्रोक या सांस लेने में तकलीफ जैसी अन्य बीमारियों को बताया जाता है। यही वजह है कि लू का यह जानलेवा आंकड़ा फाइलों में दफन होकर रह जाता है।
5 दिन की हीटवेव में 30 हजार जानें जाने की आशंका..
अध्ययन के मुताबिक, अगर देश में लगातार पांच दिनों तक गंभीर हीटवेव (Severe Heatwave) की स्थिति बनी रहे, तो लगभग 30,000 मौतों की आशंका बढ़ जाती है।
शहरों का हाल..
अहमदाबाद, जयपुर और सूरत जैसे बड़े शहरों में किसी एक अत्यधिक गर्म दिन (Peak Heatwave Day) में सामान्य दिनों के मुकाबले 250 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं, जो बेहद चिंताजनक है।
जब 40 डिग्री बड़ी बात थी, अब रातें भी 40 डिग्री पर सुलग रहीं..
जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और प्रकृति के साथ मानवीय छेड़छाड़ का नतीजा अब साफ दिखने लगा है। एक दौर था जब देश में तापमान 40 डिग्री पार करने पर अखबारों की सुर्खियां बन जाता था, लेकिन अब यह बेहद सामान्य हो चुका है। साल 2024 में राजस्थान के कुछ इलाकों में पारा 50 डिग्री तक पहुंच गया था। साल 2026 की स्थिति और भी बदतर है। कंक्रीट के जंगलों के कारण धरती दिनभर की धूप को सोख लेती है, जिससे रातें भी ठंडी नहीं हो पा रही हैं।
दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान में इस बार दिन की भीषण तपिश के बाद रात का तापमान भी 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है, जिससे लोगों को चौबीसों घंटे गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।
विशेषज्ञों की चेतावनी..
यदि पर्यावरण के प्रति यही लापरवाही जारी रही और कंक्रीट का जाल इसी तरह बढ़ता रहा, तो आने वाले कुछ सालों में बढ़ते तापमान के आगे इंसानी तकनीक (जैसे एयर कंडीशनर) भी बेअसर साबित होने लगेगी।

