4 महीने बाद होगा खामेनेई का अंतिम संस्कार, मशहद में सुपुर्द-ए-खाक; 2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान
ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार उनकी मौत के करीब चार महीने बाद किए जाने की तैयारी है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्हें उनकी अंतिम इच्छा के मुताबिक मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर के निकट दफनाया जाएगा। तेहरान, कुम और मशहद में आयोजित होने वाले अंतिम श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में करोड़ों लोगों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।
ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के लगभग चार महीने बाद आखिरकार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुताबिक, खामेनेई को आगामी 21 जून (इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक मुहर्रम की शुरुआत) के आसपास अंतिम विदाई दी जा सकती है। खामेनेई की अंतिम इच्छा के मुताबिक, उन्हें ईरान के दूसरे सबसे बड़े और शिया समुदाय के पवित्र शहर मशहद में इमाम रजा की दरगाह परिसर के पास दफनाया जाएगा।
क्यों हुई अंतिम संस्कार में 4 महीने की देरी..
आमतौर पर इस्लामी परंपरा में मौत के एक से दो दिन के भीतर शव को दफना दिया जाता है, लेकिन खामेनेई के मामले में यह देरी बेहद असामान्य है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, देश में चल रहे युद्ध के हालात, सुरक्षा कारणों और अंतिम संस्कार में उमड़ने वाली रिकॉर्डतोड़ भीड़ की तैयारियों की वजह से यह फैसला टालना पड़ा था। गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 को तेहरान में उनके आवास पर अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए एक बड़े संयुक्त हवाई हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी। पहले उनका राजकीय अंतिम संस्कार 4 मार्च को होना था, लेकिन युद्ध के चलते इसे टालना पड़ा।
3 दिन का सार्वजनिक जनाजा, तेहरान से मशहद तक अंतिम यात्रा..
तेहरान नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, लोगों को अपने सर्वोच्च नेता के अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए पूरे तीन दिन निर्धारित किए गए हैं। पूरे कार्यक्रम की जिम्मेदारी IRGC के पास है:
तेहरान में मुख्य समारोह..
खामेनेई का मुख्य अंतिम संस्कार समारोह राजधानी तेहरान में होगा, जो कम से कम 24 घंटे तक चलेगा।
धार्मिक शहरों की यात्रा..
तेहरान के बाद उनके पार्थिव शरीर को पवित्र शहर कुम (Qom) ले जाया जाएगा और वहां से अंतिम यात्रा के रूप में सड़कों से होते हुए मशहद (Mashhad) पहुंचाया जाएगा।
टूट सकता है 1989 का ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 2 करोड़ लोग होंगे शामिल..
ईरानी अधिकारियों को उम्मीद है कि इस अंतिम संस्कार कार्यक्रम में करीब 2 करोड़ (20 मिलियन) लोग शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो यह आधुनिक इतिहास का सबसे बड़ा जनाजा होगा। इससे पहले 1989 में ईरान के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग जुटे थे, जो उस समय ईरान की कुल आबादी का छठा हिस्सा था। खोमैनी के जनाजे में उमड़ी भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी, जिसमें 8 लोगों की मौत हुई थी और हजारों घायल हुए थे। इस बार अधिकारी सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हैं, लेकिन युद्ध के प्रभाव से उबर रहे देश में इतनी बड़ी भीड़ को संभालना एक महा-चुनौती माना जा रहा है।
मशहद शहर और इमाम रजा दरगाह का महत्व..
खामेनेई को मशहद में दफनाए जाने का फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। मशहद को शिया मुसलमानों का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण धार्मिक शहर माना जाता है। यहाँ शिया परंपरा के आठवें इमाम, इमाम रजा की ऐतिहासिक दरगाह है, जो दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में से एक है। यहाँ दफन होने के साथ ही खामेनेई का नाम शिया इतिहास के सबसे सम्मानित चेहरों के साथ जुड़ जाएगा।
कैसे हुई थी खामेनेई की मौत..
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू किया था, जिसके तहत तेहरान सहित कई रणनीतिक ठिकानों पर भीषण एयरस्ट्राइक की गई थीं। इस हमले में खामेनेई के घर और कार्यालय को निशाना बनाया गया था। हमले के वक्त खामेनेई बंकर में मौजूद थे, लेकिन लगातार हुए मिसाइल और ड्रोन हमलों में वह गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में दम तोड़ दिया। इस हमले में उनके साथ IRGC के कई सीनियर कमांडर, खुफिया अधिकारी और परमाणु वैज्ञानिक भी मारे गए थे।

