मऊगंज में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

मऊगंज में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने विभिन्न मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप का विरोध करते हुए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

मऊगंज में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

राजेंद्र पयासी मऊगंज

मऊगंज में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और मुख्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्री, प्रमुख सचिव और आयुक्त के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।हाथों में तख्तियां और गले में यूनियन का दुपट्टा पहने कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी की। यह प्रदर्शन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन मध्यप्रदेश, सीटू के बैनर तले राष्ट्रव्यापी आंदोलन के तहत किया गया।

पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप का विरोध

प्रदर्शन के दौरान पोषण ट्रैकर और संपर्क ऐप को लेकर कार्यकर्ताओं ने सबसे ज्यादा नाराजगी जताई। यूनियन का आरोप है कि एक ही तरह के काम के लिए दो अलग-अलग ऐप पर डाटा दर्ज कराया जा रहा है।कार्यकर्ताओं का कहना है कि ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। कई बार मोबाइल हैंग हो जाता है, जिसके कारण समय पर डाटा अपलोड नहीं हो पाता। इसके बावजूद एंट्री नहीं होने पर 7 से 15 दिन तक का मानदेय काटे जाने की शिकायत कार्यकर्ताओं ने की।यूनियन ने मांग की कि मानदेय को किसी भी ऐप की एंट्री से नहीं जोड़ा जाए और संपर्क ऐप को तत्काल बंद किया जाए।

मोबाइल की जगह टैबलेट देने की मांग

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने विभाग की ओर से दिए गए मोबाइल की क्षमता को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ई-केवाईसी, फेस कैप्चर और फोटो अपडेट जैसे काम करने में मोबाइल में तकनीकी दिक्कतें आती हैं।कार्यकर्ताओं ने सरकार से टैबलेट या लैपटॉप उपलब्ध कराने, सरकारी सिम देने और उसके रिचार्ज की व्यवस्था करने की मांग की।

OTP और फेस स्कैन को बताया अव्यावहारिक

टेक होम राशन वितरण में फेस स्कैन और OTP की व्यवस्था को लेकर भी कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। उनका कहना है कि कई हितग्राहियों के पास मोबाइल फोन नहीं है। कई लोगों के आधार कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक नहीं हैं और ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या अलग है।ऐसे में OTP आधारित व्यवस्था के कारण पात्र बच्चों तक पोषण आहार पहुंचने में परेशानी होने की आशंका कार्यकर्ताओं ने जताई।

बच्चों को स्कूल भेजने के आदेश का भी विरोध

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने 3 से 6 वर्ष की उम्र के बच्चों को सरकारी स्कूल भेजने के आदेश पर भी विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि अगर छोटे बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से हटाकर स्कूल भेजा गया तो इससे आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका प्रभावित होगी और ICDS का उद्देश्य कमजोर पड़ सकता है।यूनियन ने मांग की कि आंगनबाड़ी केंद्रों में ही KG-1 और KG-2 की पढ़ाई की व्यवस्था की जाए।

41 हजार मानदेय और सरकारी कर्मचारी का दर्जा मांगा

ज्ञापन में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग भी रखी गई। यूनियन ने कहा कि जब तक सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया जाता, तब तक कार्यकर्ताओं को 41 हजार रुपये और सहायिकाओं को 32 हजार रुपये मानदेय दिया जाए।इसके अलावा कार्यकर्ताओं ने 12 हजार रुपये पेंशन, ग्रेच्युटी, ड्यूटी के दौरान मृत्यु होने पर 5 लाख रुपये की सहायता और सेवानिवृत्ति की उम्र 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने की मांग की।रिक्त पर्यवेक्षक पदों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को पदोन्नति देने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।

भवन और अतिरिक्त काम को लेकर भी मांग

कार्यकर्ताओं ने आंगनबाड़ी केंद्रों में पानी, बिजली और पंखे जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। इसके साथ ही राशन परिवहन का खर्च देने, गर्मी की छुट्टी देने और BLO जैसे अतिरिक्त कार्यों से मुक्त करने की मांग भी रखी गई।यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।