बांधवगढ़ में गजराजों का ‘छुट्टी’ वाला उत्सव, नन्हे कृष्णा ने लूटी महफिल

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में पांच दिवसीय हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप-2026 शुरू हुआ। बारिश के बीच नन्हे हाथी कृष्णा की अठखेलियों ने सबका ध्यान खींचा।

बांधवगढ़ में गजराजों का ‘छुट्टी’ वाला उत्सव, नन्हे कृष्णा ने लूटी महफिल

उमरिया। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में झमाझम बारिश और हरियाली के बीच पांच दिवसीय हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप-2026 की शुरुआत हुई। धमोखर बफर क्षेत्र के परासी गेट के पास आयोजित इस कैंप में गजराजों को आराम, विशेष देखभाल और उनका पसंदीदा भोजन दिया जा रहा है। वहीं ग्रामीणों, पर्यटकों, पत्रकारों और वन विभाग के अधिकारियों को भी कैंप हाथियों को करीब से देखने और उनकी भूमिका समझने का मौका मिला।

नन्हे ‘कृष्णा’ ने खींचा सबका ध्यान

कैंप में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रहा नन्हा नर हाथी ‘कृष्णा’। बारिश के बीच कभी उछल-कूद तो कभी अठखेलियां करते कृष्णा ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उसकी मासूम हरकतों ने पूरे आयोजन को खास बना दिया।

कृष्णा का जन्म अक्टूबर 2025 में बांधवगढ़ में ही हुआ था। इसके बाद 31 दिसंबर 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के बांधवगढ़ प्रवास के दौरान उसका नामकरण ‘कृष्णा’ किया गया था। जंगल में जन्मा यह नन्हा गजराज अब बांधवगढ़ के हाथी परिवार की नई पीढ़ी का हिस्सा है।

बांधवगढ़ में 15 कैंप हाथी

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में फिलहाल 15 कैंप हाथी अलग-अलग जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। इनमें चार हाथियों का इस्तेमाल रेस्क्यू ऑपरेशन में और दो हाथियों को अनुश्रवण कार्य में लगाया गया है। वहीं नौ हाथियों को पुनर्यौवनीकरण कैंप में शामिल किया गया है।

सहायक संचालक धमोखर मितेन्द्र चिचखेड़े ने कैंप हाथियों के कार्य और उनकी भूमिका की जानकारी दी। वहीं बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक योहान कटारा ने कैंप के उद्देश्य और पांच दिनों के दौरान होने वाली गतिविधियों के बारे में बताया।

उन्होंने पहली बार इस तरह के आयोजन का हिस्सा बनने को अपने लिए खुशी और रोमांच का अनुभव बताया।

कलेक्टर ने भी करीब से देखा हाथियों का जीवन

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उमरिया कलेक्टर राखी सहाय ने हाथी महोत्सव को अभूतपूर्व अनुभव बताया। कार्यक्रम में DFO उमरिया विवेक सिंह, संभागीय प्रबंधक कारपोरेशन अमित पटौदी, जिला पंचायत CEO अभय सिंह ओहरिया, उप संचालक BTR योहान कटारा समेत वन विभाग के अधिकारी, पत्रकार, EDC अध्यक्ष और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे।

सिर्फ उत्सव नहीं, हाथियों की सेहत पर भी फोकस

हाथी पुनर्यौवनीकरण कैंप का मकसद सिर्फ हाथियों को आराम देना नहीं है। इस दौरान उनकी स्वास्थ्य जांच, पसंदीदा भोजन और विशेष देखभाल की जाती है। इसके साथ ही हाथियों के साथ लगातार काम करने वाले महावतों और चारा-कटरों को भी आराम का अवसर मिलता है।

परासी गेट को आयोजन स्थल बनाने का एक उद्देश्य बफर क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण से जोड़ना भी है।

एक तरफ महोत्सव, दूसरी तरफ हाथियों का रेस्क्यू

बांधवगढ़ में जहां एक तरफ गजराजों के लिए पुनर्यौवनीकरण कैंप शुरू हुआ, वहीं दूसरी तरफ बांधवगढ़ की टीम मैहर वन मंडल के गोरसरी फॉरेस्ट में हाथी रेस्क्यू अभियान में जुटी रही।

क्षेत्र संचालक के नेतृत्व में कैंप हाथी, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. तोमर और रेस्क्यू टीम अभियान में लगी हुई है। इसी वजह से कई महावत, चारा-कटर और रेस्क्यू टीम के सदस्य उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।

बांधवगढ़ का यह आयोजन हाथियों के संरक्षण और उनके साथ काम करने वाली टीम की भूमिका को समझने का भी मौका दे रहा है। बारिश के बीच नन्हे कृष्णा की अठखेलियों ने इस पूरे आयोजन को और खास बना दिया।