US ने India पर लगाया 10% अतिरिक्त Tariff, Forced Labor Goods को लेकर 60 देशों पर कार्रवाई
Trump Administration का Trade Action, भारतीय Exporters पर पड़ेगा Textile और Manufacturing Sectors में असर
अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला किया है। यह कदम अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के निर्देश पर लिया गया है। US Trade Representative (USTR) ने Forced Labor यानी जबरन मजदूरी से जुड़े उत्पादों के आयात को लेकर 60 देशों पर कार्रवाई की है।
इस फैसले के तहत भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। वहीं, 43 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका ने यह कार्रवाई Trade Act 1974 की Section 301 के तहत की है।
भारत के अलावा United Kingdom, Canada, Indonesia, Bangladesh, Mexico, Pakistan और Sri Lanka जैसे देशों को भी 10% टैरिफ वाले समूह में रखा गया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने Forced Labor से बने सामान पर रोक लगाने या श्रमिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन अभी और सुधार की जरूरत है।
भारतीय Export Sectors पर बढ़ सकता है दबाव
भारत के लिए यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि United States भारत का सबसे बड़ा Export Market है। अतिरिक्त 10% टैरिफ से उन क्षेत्रों पर ज्यादा असर पड़ सकता है, जिनका कारोबार अमेरिकी बाजार पर काफी निर्भर है।
इनमें Textile और Garments Industry, Gems and Jewellery, Leather Products, Agriculture और Food Products, Engineering Goods, Chemicals सहित Manufacturing Sector शामिल हैं।
टैरिफ बढ़ने के बाद भारतीय उत्पादों की कीमत अमेरिकी बाजार में बढ़ सकती है। इससे अमेरिकी खरीदार दूसरे देशों से सामान खरीदने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, भारतीय Exporters पर कीमत कम करने का दबाव भी बढ़ सकता है, जिससे उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
India को 12.5% की जगह मिला 10% Tariff
शुरुआत में भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 10% कर दिया गया। अमेरिकी दस्तावेजों के अनुसार, भारत ने श्रम मानकों, सप्लाई चेन निगरानी और व्यापार नीति में कुछ बदलाव किए, जिसके बाद टैरिफ में 2.5% की राहत दी गई।
US Federal Notice में कहा गया कि प्रस्तावित टैरिफ की घोषणा के बाद India ने 14 June को अपनी Foreign Trade Policy में संशोधन किया। अमेरिका ने माना कि भारत ने श्रमिक अधिकारों की निगरानी और सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कुछ कदम उठाए हैं। हालांकि, 10% टैरिफ का मतलब यह है कि भारत को पूरी छूट नहीं मिली है। अमेरिका अभी भी चाहता है कि भारत Forced Labor से जुड़े नियमों को और सख्ती से लागू करे।
क्या है Forced Labor, जिस पर US कर रहा कार्रवाई
Forced Labor का मतलब ऐसी मजदूरी से है जिसमें किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के खिलाफ काम कराया जाता है। इसमें धमकी देना, कर्ज के कारण काम करने के लिए मजबूर करना, हिंसा, दस्तावेज जब्त करना, वेतन रोकना या नौकरी छोड़ने की स्वतंत्रता नहीं देना जैसी परिस्थितियां शामिल हो सकती हैं। International Labour Organization (ILO) Forced Labor को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानता है।
अमेरिका का कहना है कि उसकी नीति का उद्देश्य उन कंपनियों और देशों पर दबाव बनाना है, जिनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल हो सकता है। इसके जरिए वह वैश्विक स्तर पर श्रमिक अधिकारों को मजबूत करना चाहता है।
Section 301 के तहत हुई कार्रवाई
अमेरिका ने यह कदम Trade Act 1974 की Section 301 के तहत उठाया है। यह प्रावधान अमेरिकी सरकार को अधिकार देता है कि वह ऐसी व्यापारिक नीतियों के खिलाफ कार्रवाई कर सके जिन्हें वह अनुचित या अमेरिकी हितों के लिए नुकसानदायक मानती है।
Section 301 के तहत US Trade Representative किसी देश की व्यापार नीति की जांच करता है। जांच के बाद बातचीत और समीक्षा की प्रक्रिया पूरी की जाती है। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन अतिरिक्त टैरिफ, आयात प्रतिबंध या अन्य व्यापारिक कदम उठा सकता है।
पहले भी कई देशों पर कार्रवाई कर चुका है US
Forced Labor के मुद्दे पर अमेरिका पहले भी कई देशों और उद्योगों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। विशेष रूप से China के Xinjiang क्षेत्र से आने वाले Cotton, Solar Panels और अन्य उत्पादों पर अमेरिका ने सख्त प्रतिबंध लगाए थे। इसके अलावा Seafood, Palm Oil, Rubber, Cocoa, Textile और Mining जैसे क्षेत्रों की सप्लाई चेन भी अमेरिकी जांच के दायरे में रही है।
भारत पर लगाए गए नए टैरिफ को लेकर अब भारतीय उद्योगों की नजर सरकार की आगे की रणनीति पर है। Exporters को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए व्यापार पर पड़ने वाले असर को कम करने के रास्ते निकाले जाएंगे।
Varsha Shrivastava 
