T G Mohandas को Bail, Jantar Mantar Remarks Case में कोर्ट ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

Kerala Court ने Journalist T G Mohandas को Jantar Mantar Remarks Case में Bail दी। कोर्ट ने BNSS Section 35(3) के तहत notice नहीं देने को गिरफ्तारी की प्रक्रिया में अहम कमी माना।

T G Mohandas को Bail, Jantar Mantar Remarks Case में कोर्ट ने गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

Kerala की Additional Chief Judicial Magistrate Court ने 71 साल के Journalist और political commentator T G Mohandas को Bail दे दी है। मामला Jantar Mantar पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को लेकर YouTube पर किए गए remarks से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा कि Mohandas को गिरफ्तार करने से पहले BNSS की Section 35(3) के तहत जरूरी notice देने की प्रक्रिया ठीक से नहीं अपनाई गई थी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला जुलाई 2026 में YouTube channel “Pathrika” पर upload किए गए कुछ videos से जुड़ा है। Prosecution के मुताबिक, 24 और 25 जुलाई को upload किए गए videos में ऐसे remarks किए गए थे, जिनसे लोगों में डर और public peace को लेकर परेशानी पैदा हो सकती थी। आरोपों में Jantar Mantar पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं को लेकर की गई टिप्पणियां और प्रदर्शन कर रहे छात्रों को गोली मारने की बात कहे जाने का आरोप भी शामिल था। इस मामले में Thiruvananthapuram City Cyber Crime Police Station में Crime No. 95/2026 दर्ज किया गया था। पुलिस ने Information Technology Act, Kerala Police Act और Bharatiya Nyaya Sanhita की अलग-अलग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

गिरफ्तारी के तरीके पर कोर्ट में उठा सवाल

Bail पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के सामने सबसे अहम सवाल यह था कि Mohandas को गिरफ्तार करने से पहले BNSS की Section 35(3) के तहत notice दिया गया था या नहीं। कोर्ट ने कहा कि मामले में लगाया गया non-bailable offence अधिकतम तीन साल की सजा वाला था। Supreme Court के Satender Kumar Antil v. Central Bureau of Investigation फैसले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में पहले notice देना सामान्य नियम है, जबकि arrest exception है और इसके लिए ठोस वजह होनी चाहिए।

पुलिस ने गिरफ्तारी के पीछे क्या वजह बताई?

पुलिस की तरफ से कहा गया था कि Mohandas के फरार होने, digital evidence मिटाने या complainant को प्रभावित करने की आशंका थी। हालांकि, कोर्ट को इन आशंकाओं के समर्थन में कोई खास material नहीं मिला। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि पुलिस को Mohandas उनके known address पर ही मिले थे और वहीं search भी की गई थी। कोर्ट के मुताबिक, Section 35(3) BNSS के तहत notice जारी नहीं करने के लिए पुलिस की तरफ से बताई गई वजहें पर्याप्त नहीं थीं।

Digital devices पहले ही जब्त हो चुके थे

कोर्ट ने यह भी देखा कि मामले से जुड़े electronic devices पुलिस पहले ही बरामद कर चुकी थी। Mohandas से पूछताछ भी की जा चुकी थी। Prosecution ने कहा कि investigation अभी शुरुआती stage में है और कुछ witnesses से पूछताछ के साथ digital evidence की जांच बाकी है। हालांकि, कोर्ट ने सिर्फ investigation जारी होने की बात को Mohandas को custody में रखने के लिए पर्याप्त नहीं माना। कोर्ट ने उनकी उम्र और उनकी तरफ से बताई गई medical concerns को भी ध्यान में रखा।

किन शर्तों पर मिली Bail?

कोर्ट ने 50 हजार रुपये के bond और इतनी ही रकम के दो solvent sureties पर Mohandas को bail दी। इसके अलावा उन्हें 11, 12 और 13 अगस्त को Investigating Officer के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया। इसके बाद दो महीने तक हर Monday या final report दाखिल होने तक, जो भी पहले हो, उन्हें जांच अधिकारी के सामने पेश होना होगा। कोर्ट ने उन्हें अपने सामान्य professional और legitimate journalistic काम के लिए digital platforms और social media इस्तेमाल करने की अनुमति भी दी है। हालांकि, उन्हें इस मामले से जुड़े content को इस तरह इस्तेमाल करने से रोका गया है जिससे investigation या justice process को प्रभावित करने, किसी को डराने या interfere करने की कोशिश हो।

Bail मिलने का क्या मतलब है?

Mohandas को Bail मिलने का मतलब यह नहीं है कि कोर्ट ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को सही या गलत मान लिया है। कोर्ट ने फिलहाल उनकी custody को जरूरी नहीं माना और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में Section 35(3) BNSS का पालन नहीं होने को अहम आधार माना है। मामले की investigation अभी जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के नतीजों के आधार पर होगी।