मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का सांकेतिक वॉकआउट, TMC के बागी सांसदों को बुलाने पर जताया विरोध

संसद के मानसून सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने TMC के बागी सांसदों को बुलाने का विरोध करते हुए सांकेतिक वॉकआउट किया। बाद में विपक्षी नेता फिर बैठक में शामिल हुए।

मानसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का सांकेतिक वॉकआउट, TMC के बागी सांसदों को बुलाने पर जताया विरोध

संसद के मानसून सत्र से एक दिन पहले रविवार को केंद्र सरकार ने सर्वदलीय बैठक बुलाई। संसद भवन एनेक्सी में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस (TMC), डीएमके समेत 10 से अधिक विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

हालांकि बैठक शुरू होने के करीब 15 मिनट बाद विपक्षी नेताओं ने सांकेतिक वॉकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप था कि सरकार ने TMC के बागी सांसदों के गुट को बैठक में बुलाया, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ने अभी तक उस गुट को आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। विरोध दर्ज कराने के बाद विपक्षी नेता दोबारा बैठक में शामिल हो गए।

महुआ मोइत्रा ने उठाए सवाल

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि टेबल ऑफिस की सूची में TMC के 28 सांसद दर्ज हैं, लेकिन NCPI नाम के उस गुट को बैठक में बुलाया गया, जिसके 20 बागी सांसदों के विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है।

उन्होंने कहा कि उनकी अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं भी लंबित हैं। ऐसे में इन सांसदों को सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित करने का आधार स्पष्ट नहीं है। इसी के विरोध में पूरे विपक्ष ने सांकेतिक वॉकआउट किया।

सरकार ने सहयोग की अपील की

बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने सभी राजनीतिक दलों से संसद के सुचारु संचालन में सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और हंगामे से किसी का लाभ नहीं होता। सरकार चाहती है कि सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक चर्चा हो।

20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र

संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान दोनों सदनों की 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत विषयों को सदन में पेश कर सकती है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

सर्वदलीय बैठक क्यों होती है?

हर संसद सत्र से पहले सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाती है, ताकि:

  • संसद के सुचारु संचालन के लिए सभी दलों का सहयोग मिल सके।
  • आगामी सत्र के विधायी एजेंडे और प्रस्तावित विधेयकों की जानकारी दी जा सके।
  • विपक्ष और अन्य दल अपने प्रमुख मुद्दों से सरकार को अवगत करा सकें।
  • संवेदनशील विषयों पर सहमति और बेहतर समन्वय बनाया जा सके।

TMC और शिवसेना के बागी सांसदों पर जारी है विवाद

एक दिन पहले लोकसभा अध्यक्ष ने TMC के बागी सांसदों को सदन में अलग बैठने की अनुमति दी थी। वहीं, उद्धव ठाकरे गुट छोड़कर एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हुए छह सांसदों को भी शिंदे गुट के साथ बैठने की मंजूरी दी गई है।

विपक्ष का कहना है कि TMC के बागी सांसदों के नए गुट को अभी तक औपचारिक मान्यता नहीं मिली है, इसलिए उन्हें सर्वदलीय बैठक में शामिल करना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।