भोपाल में प्राइवेट ट्यूबवेल खनन पर रोक,जल संकट को लेकर प्रशासन अलर्ट
गिरते भू-जल स्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए भोपाल जिले में नए निजी ट्यूबवेल और बोरवेल के खनन पर प्रशासन ने तत्काल प्रतिबंध लगा दिया है।
भोपाल: लगातार गिरते जल स्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया है। भोपाल जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित करते हुए नए निजी ट्यूबवेल और बोरवेल खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
जल स्तर गिरने से बढ़ा संकट
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अनुसार जिले में कृषि और व्यावसायिक कार्यों के लिए जल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इससे नलकूपों और अन्य पेयजल स्रोतों का जल स्तर तेजी से गिर रहा है, जिसके चलते आने वाली गर्मी के समय में गंभीर पेयजल संकट की आशंका जताई गई है।

पूरे जिले में निजी ट्यूबवेल खनन पर रोक
कलेक्टर ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत पूरे जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अशासकीय एवं निजी ट्यूबवेल और बोरवेल के खनन पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
बिना अनुमति बोरिंग मशीनों की एंट्री नहीं
आदेश के अनुसार जिले की राजस्व सीमाओं में कोई भी बोरिंग मशीन संबंधित एसडीएम की अनुमति के बिना प्रवेश नहीं कर सकेगी और न ही नए ट्यूबवेल और बोरवेल का खनन किया जा सकेगा। यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से बोरिंग कराता है या मशीन जिले में प्रवेश करती है, तो संबंधित एसडीएम और पुलिस अधिकारी मशीन जब्त कर एफआईआर दर्ज करवा सकेंगे।
उल्लंघन पर सजा का प्रावधान
आदेश का पालन नही करने वालों पर दो हजार रुपये तक का जुर्माना और दो साल तक की सजा या दोनों का प्रावधान रखा गया है। सरकारी योजनाओं के तहत किए जाने वाले नलकूप खनन पर यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। जरूरत पड़ने पर प्रशासन निजी जल स्रोतों का उपयोग भी सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए कर सकेगा।

sanjay patidar 
