कैसे बदले ब्यूटी स्टैंडर्ड और शुरू हुआ बॉडी हेयर रिमूवल ट्रेंड? महिलाओं में शेविंग और वैक्सिंग का इतिहास
आपको जानकर हैरानी होगी कि लड़कियों में शेविंग और वैक्सिंग का ट्रेंड महिलाओं द्वारा नहीं, बल्कि एक कंपनी द्वारा शुरू किया गया। ये एक बड़े मार्केटिंग कैंपेन का हिस्सा था, जिसने भविष्य के ब्यूटी स्टैंडर्ड और ट्रेंड को भी पूरी तरह से बदल डाला।
शेविंग और वैक्सिंग महिलाओं की हाइजीन और ग्रूमिंग का अहम हिस्सा बन गया है। पैरों से लेकर अंडरआर्म्स और अब तो फेस तक महिलाएं रेजर या वैक्स से साफ कर रही हैं। सभी महिलाओं को अपना शरीर बिना बालों के एकदम चिकना चाहिए, लेकिन क्या ये ट्रेंड अभी का है या आज से 100 साल पहले भी महिलाएं शेव करती थीं?
शेविंग और वैक्स के इतिहास की बात करें तो मिस्र और रोमन साम्राज्य में उच्च वर्ग की महिलाएं अपने शरीर के बाल हटाने के लिए सीपियों से बने ट्वीजर्स, मधुमक्खी की वैक्स और चीनी के लेप का इस्तेमाल करती थीं। उस समय की महिलाएं एक खास तरह की क्रीम भी लगाती थीं, जिससे बाल आसानी से हट जाते थे। साथ ही एक खास किस्म के पत्थर का इस्तेमाल भी शरीर के बाल हटाने के लिए किया जाता था। लेकिन उस समय तक निम्न वर्ग की महिलाएं बाल नहीं हटाती थीं, ये सिर्फ उच्च वर्ग तक ही सीमित था।

मध्यकाल के आते-आते धार्मिक विचारों के कारण यूरोप में शरीर के बाल हटाने का चलन कम हो गया। लेकिन उस समय भी महिलाएं अपने फेस को आकार देने के लिए आईब्रो और हेयरलाइन के बाल हटाया करती थीं।
19वीं सदी के अंत तक भी पश्चिमी देशों में महिलाएं अपने शरीर के बाल नहीं हटाती थीं, क्योंकि उस समय ऐसे कपड़े पहने जाते थे जो पूरे शरीर को ढके रहते थे। इसलिए बाल हटाने की जरूरत ही नहीं पड़ी।

मार्केटिंग कैंपेन से शुरू हुआ बॉडी हेयर रिमूवल ट्रेंड
लेकिन 19वीं सदी के अंत में महिलाओं के फैशन में बदलाव आना शुरू हुआ। कंपनियों ने महिलाओं के सुंदर दिखने की चाह का फायदा उठाते हुए स्लीवलेस ड्रेसेज बनाना शुरू किया। जैसे ही मार्केट में स्लीवलेस ड्रेसेज का चलन बढ़ा, कंपनियों ने इसका फायदा उठाया और 1915 में एक मार्केटिंग कैंपेन चलाया गया, जिसे द फर्स्ट ग्रेट एंटी-हेयर मूवमेंट कहा गया।

इस कैंपेन में महिलाओं को अंडरआर्म्स के बाल हटाने के लिए प्रेरित किया गया, ताकि वे मॉडर्न और फैशनेबल दिख सकें। इतना ही नहीं, मार्केट में एक खास तरह का रेजर भी लॉन्च किया गया, जो काम तो बिल्कुल मेंस वाले रेजर जैसा करता था, लेकिन क्योंकि वो महिलाओं के लिए बनाया गया था, इसलिए इसका कलर पिंक और कीमत ज्यादा रखी गई। और तभी से महिलाओं ने स्लीवलेस ड्रेसेज पहनने के लिए अंडरआर्म्स शेव करना शुरू कर दिया।

विश्व युद्ध बना पैर शेविंग की वजह
अब तक महिलाएं सिर्फ अंडरआर्म्स ही शेव कर रही थीं, क्योंकि वो ड्रेसेज के नीचे स्टॉकिंग्स पहन लेती थीं। लेकिन दूसरे विश्व युद्ध के समय सेना के लिए पैराशूट बनाने के लिए नायलॉन का इस्तेमाल बढ़ गया, जिससे मार्केट में स्टॉकिंग्स की कमी हो गई। और महिलाएं बिना स्टॉकिंग्स के ड्रेस और स्कर्ट्स पहनने लगीं। तभी से पैरों की शेविंग का सिलसिला शुरू हुआ।

विश्व युद्ध के बाद मार्केट में घुटनों से ऊपर की ड्रेसेज और बिकिनी का चलन शुरू हुआ, जिसने महिलाओं के बीच शेविंग पर और भी जोर दिया। आज की बात करें तो आजकल महिलाएं शेविंग, वैक्सिंग के साथ-साथ लेजर ट्रीटमेंट तक करवाने लगी हैं।


