दिलजीत की 'सतलुज' पूरी तरह बैन, OTT की ग्लोबल कैटेगरी से भी हटाई गई फिल्म
दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ पर बैन: जानिए फिल्म क्यों हुई बैन? जसवंत सिंह खालड़ा की कहानी पर बनी दिलजीत दोसांझ की फिल्म को लेकर विवाद क्यों गहराया?
पंजाबी एक्टर और सिंगर दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ इन दिनों विवादों में है। फिल्म की रिलीज के कुछ समय बाद ही इसे OTT प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया, जिसके बाद इसकी कहानी, विषय और सेंसरशिप को लेकर बहस तेज हो गई है। फिल्म को भारत में हटाने के बाद OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 ने इसे ग्लोबल कैटेगरी से भी हटा दिया है।
जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है फिल्म
‘सतलुज’ प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और संघर्ष पर आधारित फिल्म है। फिल्म में दिलजीत दोसांझ ने खालड़ा का किरदार निभाया है। कहानी पंजाब में 1980 और 1990 के दशक के उग्रवाद के दौर की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जब राज्य हिंसा, आतंकवाद और सुरक्षा अभियानों के कारण गंभीर संकट से गुजर रहा था।

फिल्म में खालड़ा द्वारा पंजाब में कथित तौर पर अज्ञात शवों के दाह संस्कार और लापता लोगों के मामलों की जांच को दिखाया गया है। खालड़ा ने इन मामलों को सामने लाने के लिए दस्तावेज जुटाए और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया था।
फिल्म को लेकर क्यों उठा विवाद?
फिल्म को लेकर आपत्ति मुख्य रूप से इसके कथानक और प्रस्तुति को लेकर सामने आई है। कुछ पक्षों का कहना है कि फिल्म पंजाब के संवेदनशील दौर को एकतरफा तरीके से दिखाती है और इसमें उग्रवाद और सुरक्षा बलों की भूमिका का संतुलित चित्रण नहीं किया गया है।

वहीं फिल्म के समर्थकों का तर्क है कि यह एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के संघर्ष और न्याय के लिए उनकी लड़ाई को दिखाती है। उनके अनुसार, ऐतिहासिक घटनाओं पर आधारित फिल्मों में अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आना जरूरी है और ऐसी कहानियों को दबाया नहीं जाना चाहिए।
सरकार की आपत्तियों के बाद हुई कार्रवाई
रिपोर्टों के मुताबिक, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए फिल्म की समीक्षा कराई। इसके बाद फिल्म को OTT प्लेटफॉर्म से हटाने का फैसला लिया गया। मामले की जांच के लिए एक अंतर-विभागीय समिति भी गठित की गई थी, जिसने फिल्म की सामग्री पर अपनी राय दी। सरकारी पक्ष से जुड़े सूत्रों के अनुसार, समिति ने फिल्म को प्रतिबंधित रखने की सिफारिश की है। हालांकि, इस मामले में अंतिम स्थिति आगे की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।

क्या दोबारा रिलीज होगी ‘सतलुज’?
फिलहाल फिल्म की वापसी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। अगर निर्माता पक्ष कानूनी रास्ता अपनाता है या फिल्म में बदलाव को लेकर सहमति बनती है, तो इसके दोबारा रिलीज होने की संभावना बन सकती है।

इस विवाद ने एक बार फिर फिल्मों में ऐतिहासिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषयों को दिखाने की स्वतंत्रता, सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की सीमा पर बहस शुरू कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि ‘सतलुज’ को लेकर आगे क्या फैसला लिया जाता है।
Varsha Shrivastava 
