Dhamaal 4 Review: घिसी-पिटी स्टोरी और फीके जोक्स, क्या वाकई देखने लायक है फिल्म?
धमाल 4 आज से सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई है। डबल धमाल (2011) और टोटल धमाल (2019) के बाद यह धमाल फ्रेंचाइज़ी की चौथी फिल्म है, जो घिसी-पिटी स्टोरी और बकवास VFX के साथ आपको देखने को मिलेगी। फिल्म देखने जाएं या नहीं, इससे पहले आप रिव्यू तो ले ही लीजिए, क्योंकि थिएटर में टाइम और पैसे वेस्ट करने से बेहतर है 2 मिनट अपना माथा फोड़ना।
फ्रेंचाइज़ी तभी बनाई जाती है जब पहले पार्ट ने थिएटर में गदर मचा दिया हो। या फिर फिल्म की स्टोरी ने लोगों का दिल जीत लिया हो और वो सीक्वल का इंतजार कर रहे हों। लेकिन काफी कम ही ऐसी फिल्म होती हैं जिनका सीक्वल भी ब्लॉकबस्टर हो। अब कोई भी फिल्म धुरंधर या बाहुबली थोड़े बन सकती है।

धमाल 4 की बात करें तो डबल धमाल और टोटल धमाल की तरह इस फिल्म की स्टोरी भी बकवास या कहें कि घिसी-पिटी ही है। फिल्म में 100 साल पहले समुद्री लुटेरे शैतान सिंह की कहानी है, जिसने अंग्रेजों से खजाना लूटकर उसे एक टापू पर छुपा दिया था।
और अब सभी किरदार उस खजाने को ढूंढने में लगे हैं। समुद्री लुटेरे ने एक नक्शा भी दे रखा था, जिसे देखकर सब खजाने की तलाश कर रहे हैं। ये स्टोरी किसी कार्टून से कम नहीं है। और अब तो कार्टून में भी इससे अच्छी स्टोरी मिल जाती है।

बात करें जोक्स और डायलॉग्स की तो फिल्म के जोक्स से बेहतर तो रील्स की कॉमेडी होती है आजकल। कुल मिलाकर देखा जाए तो फिल्म पूरी तरह से वेस्ट ऑफ मनी है। लेकिन एक बात समझ नहीं आती, जब मेकर्स के पास ढंग की स्टोरी ही नहीं होती तो फिल्म बनाते ही क्यों हैं, और ये एक्सपेक्ट कैसे कर लेते हैं कि ऑडियंस को ये फिल्में पसंद आएंगी।


