हाईकोर्ट की सख्ती: ACS मनीष रस्तोगी समेत 3 वरिष्ठ अफसरों पर जमानती वारंट, 15 जुलाई को होगी पेशी
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आदेश की अवहेलना पर ACS मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन और संचालक अजय गुप्ता के खिलाफ 25-25 हजार रुपये के जमानती वारंट जारी किए। तीनों अधिकारियों को 15 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होकर जवाब देना होगा।
जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर खंडपीठ ने न्यायालय के आदेशों की अनदेखी करने के मामले में राज्य के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) मनीष रस्तोगी, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेल्वेंद्रन और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक अजय गुप्ता के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सभी अधिकारी 15 जुलाई 2026 को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर जवाब देंगे।
सेवानिवृत्त अधिकारी की याचिका से शुरू हुआ मामला
पूरा विवाद कृषि विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर देवदत्त विश्वकर्मा की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। उनका कहना है कि सेवानिवृत्ति के बाद उनसे 2.10 लाख रुपए की वसूली की गई थी। बाद में हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को आदेश देते हुए सरकार को पूरी राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने के निर्देश दिए थे।
याचिकाकर्ता का आरोप है कि अदालत के स्पष्ट आदेश के बावजूद अब तक राशि वापस नहीं की गई, जिसके बाद उन्होंने अवमानना याचिका दायर की।


कोर्ट के बुलावे के बावजूद नहीं पहुंचे अधिकारी
सुनवाई के दौरान अदालत ने पहले ही संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद ACS मनीष रस्तोगी अदालत नहीं पहुंचे। उनकी ओर से न तो कोई अधिकृत प्रतिनिधि व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट का आवेदन लेकर आया और न ही अनुपस्थिति का संतोषजनक कारण बताया गया।
अन्य अधिकारियों की ओर से वकील तो मौजूद रहे, लेकिन अधिकारी स्वयं कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए। इस पर न्यायालय ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि अदालत के आदेशों का पालन सभी के लिए अनिवार्य है।
वारंट की तामील एसपी के जरिए होगी
हाईकोर्ट ने तीनों अधिकारियों के खिलाफ जारी जमानती वारंट की तामील संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) के माध्यम से कराने के निर्देश दिए हैं। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अगली सुनवाई पर कोई भी अधिकारी अनुपस्थित न रहे।
दो अधिकारियों को सुनवाई के दौरान बुलाना पड़ा
सुनवाई के समय कृषि विस्तार अधिकारी एस.के. निगम और संभागीय पेंशन अधिकारी नमिता बी भी अदालत में मौजूद नहीं थे। इस पर कोर्ट ने सरकारी पक्ष के अधिवक्ता को तत्काल दोनों अधिकारियों से संपर्क करने और उन्हें कोर्ट में पेश कराने के निर्देश दिए।
बाद में दोनों अधिकारी अदालत पहुंचे। न्यायालय ने उनसे पूछा कि पहले से सूचना होने के बावजूद वे समय पर अदालत क्यों नहीं पहुंचे और उनसे इस संबंध में स्पष्टीकरण भी मांगा।
15 जुलाई को पेश होगी अनुपालन रिपोर्ट
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 तय की है। अदालत ने निर्देश दिए हैं कि सभी संबंधित अधिकारी उस दिन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर 8 मई 2024 के आदेश के पालन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि यदि न्यायालय के आदेशों की लगातार अनदेखी होती रही तो आगे और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
Anubhav Dubey 
