गोरे लोगों के लिए लिखी जाती हैं कहानियां, बॉलीवुड में रंगभेद पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी का दावा, स्मिता पाटिल को बताया सबसे खूबसूरत

नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बॉलीवुड में फैले रंगभेद पर बेबाक राय रखते हुए कहा कि यहाँ आज भी गोरी त्वचा को प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने स्मिता पाटिल को सबसे खूबसूरत बताते हुए फिल्म इंडस्ट्री के सुंदरता के संकीर्ण मानकों और स्क्रिप्ट्स में भेदभाव को चुनौती दी।

गोरे लोगों के लिए लिखी जाती हैं कहानियां, बॉलीवुड में रंगभेद पर नवाजुद्दीन सिद्दीकी का दावा, स्मिता पाटिल को बताया सबसे खूबसूरत
नवाजुद्दीन सिद्दीकी & स्मिता पाटिल

बॉलीवुड अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में मौजूद रंगभेद (कलरिज्म) को लेकर साफ-साफ अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि बॉलीवुड में आज भी गोरी त्वचा को ज्यादा महत्व दिया जाता है और ज्यादातर मुख्य किरदार (लीड रोल) गोरे रंग के कलाकारों के लिए ही लिखे जाते हैं। एक इंटरव्यू में नवाजुद्दीन ने बताया कि अपने 20 साल लंबे करियर में कई बार सिर्फ उनके रंग की वजह से उन्हें प्रोजेक्ट्स से बाहर कर दिया गया। उन्होंने माना कि इंडस्ट्री में नेपोटिज्म (पारिवारिक पक्षपात) के साथ-साथ रंगभेद की समस्या और भी गहरी है।

नवाजुद्दीन के मुख्य बयान..
बॉलीवुड में कहानियां और स्क्रिप्ट्स ज्यादातर गोरे लोगों के लिए लिखी जाती हैं। सुंदरता का एक तय मानक बना हुआ है, उसी के हिसाब से किरदार तैयार किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई एक तरह के भेदभाव को खत्म करने की कोशिश करता है तो उसे सराहा जाता है, लेकिन दूसरे तरह के भेदभाव पर सवाल नहीं उठाए जाते। सुंदरता को किसी एक पैमाने से नहीं बांधा जाना चाहिए। हर व्यक्ति को अपनी पसंद और परिभाषा तय करने की आजादी होनी चाहिए। नवाजुद्दीन ने यह भी कहा कि जिन अभिनेत्रियों को डार्क स्किन कहा जाता है, उन्हें अक्सर औसत माना जाता है, जबकि पश्चिमी देशों में उसी को एक्सोटिक और खास खूबसूरती माना जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समस्या सिर्फ कलाकारों की नहीं है, बल्कि फिल्मों की कहानियां और स्क्रिप्ट्स ही इस सोच को बढ़ावा देती हैं।

स्मिता पाटिल को बताया सबसे खूबसूरत..
बातचीत के दौरान नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने दिवंगत अभिनेत्री स्मिता पाटिल की खूब तारीफ की। उन्होंने कहा, मैंने आज तक स्मिता पाटिल से ज्यादा खूबसूरत किसी को नहीं देखा। कैमरे पर उनकी खूबसूरती बेजोड़ थी। कैमरा किसी तरह का भेदभाव नहीं करता। स्मिता पाटिल 1970-80 के दशक में समानांतर सिनेमा की प्रमुख हस्ती थीं। उन्होंने मंथन, भूमिका, चक्र, सद्गति जैसी फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता से अलग पहचान बनाई थी। नवाजुद्दीन का यह बयान स्मिता पाटिल की प्राकृतिक और गहरी खूबसूरती को सलाम करने जैसा है।

इरफान खान और नवाजुद्दीन का योगदान..
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कहा कि इरफान खान और उन्होंने जैसे कलाकारों ने मुख्यधारा के सिनेमा में इस पारंपरिक सोच को चुनौती दी है। दोनों ही अभिनेताओं ने अपनी मेहनत और टैलेंट के दम पर लीड रोल हासिल किए, भले ही वे पारंपरिक ‘गोरा-चिट्टा’ हीरो वाले मानकों पर खरे न उतरते हों।


नवाजुद्दीन का वर्तमान वर्क फ्रंट..
फिलहाल नवाजुद्दीन सिद्दीकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म रात अकेली है और थामा  में नजर आए थे। उनके आने वाले प्रोजेक्ट्स में नूरानी चेहरा और तुम्बाड जैसी फिल्में शामिल हैं। नवाजुद्दीन का यह बयान बॉलीवुड में लंबे समय से चली आ रही बहस को फिर से जिंदा कर रहा है। पहले भी कई कलाकारों ने कलरिज्म और स्किन टोन बायस पर अपनी बात रखी है, लेकिन नवाजुद्दीन ने इसे काफी सीधे और स्पष्ट शब्दों में रखा है। नवाजुद्दीन सिद्दीकी का कहना है कि बॉलीवुड को सुंदरता के संकीर्ण मानकों से बाहर निकलना चाहिए। हर रंग और हर प्रकार की खूबसूरती को बराबर सम्मान मिलना चाहिए। स्मिता पाटिल जैसी अभिनेत्रियों को याद करके उन्होंने यह भी संदेश दिया कि असली खूबसूरती अभिनय और व्यक्तित्व में होती है, न कि सिर्फ रंग में।