नरसिंहपुर में 65 लाख के सड़क घोटाले का खुलासा, ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और ठेकेदारों पर केस दर्ज

EOW जबलपुर ने मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, नरसिंहपुर के अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।

नरसिंहपुर में 65 लाख के सड़क घोटाले का खुलासा, ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के अधिकारियों और ठेकेदारों पर केस दर्ज

नरसिंहपुर। जिले में सड़क निर्माण कार्य में अनियमितता और सरकारी राशि के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर ने मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, नरसिंहपुर के अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। आरोप है कि अधिकारियों ने ठेकेदारों के साथ मिलीभगत कर घटिया गुणवत्ता की सड़कें बनवाईं और शासन को लगभग 65 लाख रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई।

EOW ने दर्ज मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 120बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की है। यह मामला 19 नवंबर 2020 से 12 सितंबर 2023 के बीच हुए कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है। इस मामले में तत्कालीन महाप्रबंधक विष्णु कुमार टेंटवाल, तत्कालीन सहायक प्रबंधक आयुषी उपाध्याय, लेखा अधिकारी अनिल वासनिक सहित ठेकेदार फर्म मेसर्स मदनलाल एंड पार्टनर्स और मेसर्स श्रीराम कंस्ट्रक्शन समेत अन्य को आरोपी बनाया गया है।

बताया गया है कि आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ को ग्वालियर निवासी शिकायतकर्ता हेमंत खरे ने शिकायत की थी, जिसमें नरसिंहपुर जिले में घटिया सड़क निर्माण और शासकीय धन के गबन की बात कही गई थी। शिकायत की जांच के दौरान पाया गया कि जनवरी 2023 में जिले के अंतर्गत कोड़िया से लिलवानी, गाडरवारा-तेंदूखेड़ा रोड से लिलवानी और गोटिटोरिया से सिंगपुर मार्ग के निर्माण कार्य में मानकों के विपरीत घटिया सामग्री का उपयोग किया गया। तकनीकी जांच में सड़क निर्माण की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई और उपयोग किए गए मटेरियल के सैंपल भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिले। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्य को मंजूरी देते हुए ठेकेदारों को भुगतान कर दिया।

जांच में यह भी सामने आया कि सड़क निर्माण कार्य के निरीक्षण में उपयोग किए गए वाहन के नाम पर 5.50 लाख रुपये का अवैध भुगतान किया गया। इसके अतिरिक्त घटिया सड़क निर्माण के बावजूद करीब 65 लाख रुपये का भुगतान ठेकेदारों को कर दिया गया, जिससे शासन को सीधा आर्थिक नुकसान हुआ। EOW का कहना है कि सभी आरोपियों ने आपसी सहमति से अपने पद का दुरुपयोग करते हुए धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात किया है। फिलहाल, मामले की विवेचना जारी है और आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।