मऊगंज-रीवा में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान
मऊगंज और रीवा जिले में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया, जिससे कटाई और गहाई प्रभावित हुई। लगातार बदलते मौसम और बारिश के कारण खेतों और खलिहान में रखी फसल दोनों को नुकसान हुआ, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।
प्रदेश के मऊगंज एवं रीवा जिले में बेमौसम बारिश और कुछ स्थानों पर हुई हल्की ओलावृष्टि ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बीते 28 घंटे से भी अधिक समय से अचानक बदले मौसम ने खेती-किसानी को गहरा नुकसान पहुंचाया है। शनिवार की सुबह मनगवां विधानसभा क्षेत्र के आधा सैकड़ा ग्रामों में हुई झमाझम बारिश के बाद दिन में मौसम साफ रहा, वहीं देर रात मौसम बिगड़ा तो रविवार को तड़के एक बार फिर लपक-गरज के साथ मऊगंज एवं रीवा जिले के कई गांवों में तेज बारिश हुई।

रविवार की सुबह बारिश का दौर रुकते ही दर्जन भर ग्रामों में चने से लेकर बेर के आकार के ओले गिरे, जिससे सरसों एवं गेहूं जैसी फसलों को नुकसान हुआ। गनीमत रही कि हुई ओलावृष्टि का दौर ज्यादा समय तक नहीं रहा, अन्यथा किसानों के खेतों में पककर तैयार फसल को बड़ा नुकसान हो सकता था।
कभी धूप तो कभी घने बादल जैसे चल रहे मौसम के कारण इलाके में बीते 48 घंटे से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने न केवल खेतों में खड़ी फसलों को बुरी तरह प्रभावित किया है, बल्कि खलिहान में रखी फसल भी नुकसान के कगार पर पहुंच चुकी है। जिससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरता दिख रहा है। तेज हवा और बारिश से मऊगंज एवं रीवा जिले के अधिकतर क्षेत्रों में चना, सरसों और गेहूं जैसी प्रमुख फसलों को क्षति हुई है।

किसानों के खेत में पककर तैयार फसल की जहां कटाई प्रभावित हुई है, वहीं खेतों से कटकर खलिहान में रखी फसल की समय पर गहाई नहीं हो पा रही है। मौसम की इस मार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। मौसम के बिगड़े मिजाज के कारण क्षेत्र में हो रही रुक-रुक कर बारिश से खलिहान में रखी फसल से लेकर खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान हुआ है।
रविवार को दिन निकलते ही गिरे ओले
मौसम के बिगड़े मिजाज के कारण क्षेत्र में रुक-रुक कर हो रही बारिश का दौर अनवरत जारी रहने से किसानों की फसल की कटाई एवं गहाई प्रभावित हुई है। इसी बीच रविवार की सुबह मऊगंज जिले के बधवा भाईवांट, बधवा कोठार, कठमलिया, छिउलहा, जरकटी, कसियार गांव जैसे दर्जन भर ग्रामों में चने एवं बेर के आकार के ओले गिरे। हालांकि ओलावृष्टि का दौर चंद मिनट के लिए ही रहा, जिससे किसानों की फसल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, अन्यथा ओलावृष्टि ज्यादा समय तक होती तो क्षेत्र का किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाता।

रविवार की सुबह हुई ओलावृष्टि से नुकसान का आकलन नहीं मिल पाया है। क्षेत्र के किसान नागेंद्र सिंह बधवा एवं बाल्मीक कुशवाहा ने बताया कि ओलावृष्टि के कारण खेत में खड़ी गेहूं, सरसों, चना जैसी फसल टूटकर गिर गई है। किसानों ने कहा कि बीते 48 घंटे से हो रही बारिश के कारण वैसे भी पककर तैयार गेहूं, चना एवं अन्य फसलों के दानों का रंग बदल गया है। पकी फसल में पानी पड़ जाने के कारण दानों के रंग में आए परिवर्तन से बाजार में अनाज का बेहतर मूल्य नहीं मिल पाएगा और अब ओलावृष्टि के कारण हम बर्बादी के कगार पर पहुंच चुके हैं।

