कम खाना, ज्यादा एनर्जी? इंटरमिटेंट फास्टिंग पर रिसर्च ने खोले नए राज

क्या कम खाना खाने से बॉडी में रहती है ज्यादा एनर्जी, यह टेक्निक खतरनाक या कामयाब?

कम खाना, ज्यादा एनर्जी? इंटरमिटेंट फास्टिंग पर रिसर्च ने खोले नए राज
Eating Less For Energy

आजकल वेट लॉस और फिट रहने की चाह में लोग तरह-तरह के तरीके अपना रहे हैं। कोई कैलोरी गिनकर खाना कम कर रहा है, तो कोई इंटरमिटेंट फास्टिंग जैसे ट्रेंड को फॉलो कर रहा है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह है कि क्या सच में कम खाना खाने से शरीर में ज्यादा एनर्जी रहती है या फिर यह तरीका सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है? 

कम खाने से एनर्जी कैसे जुड़ी है?

आमतौर पर यह माना जाता है कि कम खाने से शरीर कमजोर हो सकता है और एनर्जी लेवल गिर सकता है। लेकिन रिसर्च बताती है कि अगर सही तरीके और सही पैटर्न के साथ कैलोरी कम की जाए, तो शरीर अपनी एनर्जी को ज्यादा बेहतर ढंग से मैनेज कर पाता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग में लोग रोज़ भूखे नहीं रहते, बल्कि हफ्ते के कुछ दिन कम खाते हैं और बाकी दिनों में संतुलित भोजन लेते हैं। इससे शरीर को रिकवरी का समय मिलता है और मेटाबॉलिज्म पर भी पॉजिटिव असर पड़ सकता है।

स्टडी में क्या सामने आया?

मेडिकल जर्नल Annals of Internal Medicine में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन के मुताबिक, जो लोग हफ्ते में 3 दिन इंटरमिटेंट फास्टिंग करते थे, उनका वजन उन लोगों की तुलना में ज्यादा घटा, जो रोज़ाना कैलोरी कम करने वाली डाइट पर थे। एक साल तक चली इस स्टडी में इंटरमिटेंट फास्टिंग अपनाने वालों ने औसतन अपने शरीर के वजन का करीब 7.6 प्रतिशत घटाया, जबकि रोज़ कैलोरी घटाने वाले लोगों में यह कमी लगभग 5 प्रतिशत रही। आंकड़ों के आधार पर देखा जाए तो फास्टिंग ग्रुप में वजन घटाने का असर करीब 50 प्रतिशत ज्यादा था।

रिसर्च कैसे की गई?

इस रिसर्च में कुल 165 ओवरवेट और मोटापे से जूझ रहे लोगों को शामिल किया गया। इन्हें दो ग्रुप में बांटा गया। पहले ग्रुप ने 4:3 इंटरमिटेंट फास्टिंग पैटर्न अपनाया। यानी हफ्ते के 3 दिन उन्होंने अपनी सामान्य कैलोरी का करीब 80 प्रतिशत कम खाया और बाकी 4 दिन सिर्फ हेल्दी खाने की सलाह दी गई, बिना सख्त कैलोरी गिनती के। दूसरे ग्रुप को रोज़ाना लगभग 34 प्रतिशत कैलोरी कम करने का लक्ष्य दिया गया। कागज पर दोनों ग्रुप का साप्ताहिक कैलोरी डेफिसिट लगभग बराबर था, लेकिन नतीजे अलग-अलग रहे।

नतीजे क्यों रहे बेहतर?

इंटरमिटेंट फास्टिंग ग्रुप के लोगों ने औसतन 7.7 किलो वजन कम किया, जबकि रोज़ कैलोरी घटाने वाले ग्रुप में यह आंकड़ा करीब 4.8 किलो रहा। इसके अलावा, फास्टिंग ग्रुप में बीच में डाइट छोड़ने वालों की संख्या भी कम पाई गई। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका एक बड़ा कारण यह है कि इस तरीके में हर दिन कैलोरी गिनने का तनाव नहीं रहता और लोगों को हमेशा भूखे रहने का एहसास भी नहीं होता। इससे लंबे समय तक इस पैटर्न को अपनाना आसान हो जाता है।

क्या यह तरीका खतरनाक भी हो सकता है?

एक्सपर्ट्स साफ करते हैं कि कम खाना तभी फायदेमंद है जब यह संतुलित और समझदारी से किया जाए। बहुत ज्यादा सख्ती, लंबे समय तक भूखा रहना या बिना मेडिकल सलाह के एक्सट्रीम फास्टिंग करना सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। सही पोषण, पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स के बिना वजन घटाने की कोशिश शरीर की एनर्जी को नुकसान पहुंचा सकती है।

यानी साफ है कि सही तरीके से अपनाई गई इंटरमिटेंट फास्टिंग न सिर्फ वजन घटाने में मददगार हो सकती है, बल्कि शरीर की एनर्जी को बेहतर ढंग से मैनेज करने में भी सहायक हो सकती है। हालांकि, हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है, इसलिए किसी भी डाइट पैटर्न को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।