खरगोन हिंसा: रामनवमी जुलूस से भड़की थी हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची

खरगोन में 2022 की रामनवमी हिंसा के बाद हुई बुलडोजर कार्रवाई देशभर में चर्चा का विषय बनी। जानिए हिंसा, प्रशासनिक कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे मामले की पूरी कहानी।

खरगोन हिंसा: रामनवमी जुलूस से भड़की थी हिंसा, बुलडोजर कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची

मध्य प्रदेश के खरगोन में अप्रैल 2022 में रामनवमी के मौके पर सप्रदायिक हिंसा और उसके बाद प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई की चर्चा देशभर हुई थी. इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया.

रामनवमी जुलूस के दौरान भड़की थी हिंसा

10 अप्रैल 2022 को रामनवमी पर खरगोन शहर में धार्मिक जुलूस निकाला जा रहा था. इसी दौरान डीजे बजाने और नारों को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया. देखते ही देखते कहासुनी हिंसक झड़प में बदल गई और शहर के कई इलाकों में पथराव, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं. हिंसा के दौरान कई दुकानों, मकानों और वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया. इस उपद्रव में करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था.

175 से अधिक लोगों को बनाया गया आरोपी

घटना के बाद पुलिस ने अलग-अलग धाराओं में कई FIR दर्ज कीं. जांच के दौरान 175 से अधिक लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया. बड़ी संख्या में आरोपियों की गिरफ्तारी भी की गई और सुरक्षा व्यवस्था के लिए शहर में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया.

24 घंटे के भीतर चली बुलडोजर कार्रवाई

हिंसा के अगले ही दिन जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बुलडोजर कार्रवाई शुरू कर दी. प्रशासन ने पांच मुस्लिम बहुल बस्तियों के 16 मकानों और 29 दुकानों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्त कर दिया. उस समय मध्य प्रदेश के तत्कालीन गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने इस कार्रवाई का सार्वजनिक रूप से समर्थन किया था.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

बुलडोजर कार्रवाई को चुनौती देते हुए अप्रैल 2022 में जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. याचिका में आरोप लगाया गया कि बिना उचित कानूनी नोटिस और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए संपत्तियां तोड़ी गईं, जो संविधान प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है. याचिका में राज्यों द्वारा कथित तौर पर मनमाने ढंग से की जा रही बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी. यह मामला बाद में देशभर में बुलडोजर कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया को लेकर हुई बहस का प्रमुख आधार बना.