ईरान ने इजराइल पर क्लस्टर मिसाइलें दागीं, तेल अवीव समेत कई इलाके निशाने पर

ईरान ने जिन बमों का इस्तेमाल किया, वे थे खोर्रमशहर-4 और खैबर शिकन, जो लंबी दूरी के टारगेट के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। इस बम की खासियत यह है कि ये मिसाइलें जमीन से करीब 7 किलोमीटर की ऊंचाई पर हवा में ही फट जाती हैं। इसके अंदर करीब 20 छोटे बम (सब-मुनिशन्स) होते हैं, जो फटने के बाद ऊपर से गिरते हैं।

ईरान ने इजराइल पर क्लस्टर मिसाइलें दागीं, तेल अवीव समेत कई इलाके निशाने पर

इजराइल और ईरान जंग को आज सात दिन हो चुके हैं। दोनों ही तरफ से मिसाइलें दागी जा रही हैं। इसी बीच ईरान ने 5 मार्च की रात इजराइल पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इजराइली रक्षा बलों (IDF) और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने 'खैबर शिकन' (Kheibar Shekan) जैसी उन्नत मिसाइलें दागीं, जिनमें क्लस्टर सब-मुनिशन्स लगे थे।

क्लस्टर बम विशेषताएं

ईरान ने जिन बमों का इस्तेमाल किया, वे थे खोर्रमशहर-4 और खैबर शिकन, जो लंबी दूरी के टारगेट के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। इस बम की खासियत यह है कि ये मिसाइलें जमीन से करीब 7 किलोमीटर की ऊंचाई पर हवा में ही फट जाती हैं। इसके अंदर करीब 20 छोटे बम (सब-मुनिशन्स) होते हैं, जो फटने के बाद ऊपर से गिरते हैं।

ये मिसाइलें फटने के बाद करीब 8 किलोमीटर के दायरे में फैल जाती हैं, जिससे एक बड़े इलाके में खतरनाक और बड़े पैमाने पर तबाही होती है। ईरान ने 5 मार्च की रात मुख्य रूप से तेल अवीव (Tel Aviv) और मध्य इजराइल के अन्य घने आबादी वाले क्षेत्रों पर इन मिसाइलों से हमला किया।

इजराइल का आरोप

इस बीच ईरान के बैलिस्टिक मिसाइलें दागने पर इजराइल का कहना है कि ईरान जानबूझकर क्लस्टर बमों का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों को नुकसान पहुँचाया जा सके। क्योंकि ये मिसाइलें सटीक निशाना लगाने के लिए नहीं, बल्कि बड़े इलाके में बड़े पैमाने पर तबाही मचाने के लिए बनाई गई हैं।

क्लस्टर बमों पर प्रतिबंध

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में क्लस्टर बमों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा हुआ है। लेकिन ईरान और इजराइल दोनों ने ही इस अंतरराष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।