छत्तीसगढ़ में 1.5 करोड़ के LPG की चोरी: पेट्रोकेमिकल्स प्लांट में गैस चोरी का बड़ा खुलासा, मालिक-डायरेक्टर फरार
महासमुंद में LPG चोरी का बड़ा घोटाला उजागर: 90 टन गैस गायब, 6 गाड़ियां पकड़ाई, पेट्रोकेमिकल्स पर अवैध बिक्री और हेराफेरी के गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में LPG (एलपीजी) गैस चोरी और हेराफेरी का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी पर आरोप है कि उसे सुरक्षित रखने के लिए सौंपे गए LPG कैप्सूल ट्रकों से करीब 1.5 करोड़ रुपये मूल्य की गैस अवैध रूप से निकालकर बेच दी गई।
इस मामले में कंपनी के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर साकिन ठाकुर फरार बताए जा रहे हैं, जबकि एक स्टाफ सदस्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही पुलिस ने बड़ी मात्रा में सामग्री जब्त की है, जिसमें 7 LPG टैंकर, 4 बुलेट टैंक, 100 गैस सिलेंडर, कंप्यूटर, DVR और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने 6 LPG गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए थे। ये सभी ट्रक बिना उचित दस्तावेजों के पाए गए थे, जिसके बाद इन्हें थाने में खड़ा कर दिया गया। सुरक्षा कारणों को देखते हुए पुलिस ने जिला प्रशासन को पत्र लिखा, जिसके बाद कलेक्टर के निर्देश पर खाद्य विभाग को इन ट्रकों की देखरेख और सुरक्षित स्थान पर रखने की जिम्मेदारी दी गई।
इसी आदेश के तहत 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम ने इन ट्रकों को ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी को “सुरक्षित रखने” के लिए सौंप दिया। यहीं से इस पूरे मामले में गड़बड़ी की शुरुआत मानी जा रही है।

प्लांट में ले जाने के बाद शुरू हुई हेराफेरी
आरोपों के मुताबिक, कंपनी के मालिक संतोष ठाकुर ने अपने स्टाफ की मदद से सभी 6 कैप्सूल ट्रकों को रायपुर के अभनपुर स्थित अपने प्लांट में ले जाकर पार्क कर दिया। हैरानी की बात यह रही कि ट्रकों का वजन हैंडओवर के समय या बाद में सही तरीके से नहीं किया गया, जिससे गैस की वास्तविक मात्रा का पता नहीं चल सका।
जांच में यह भी सामने आया कि इन ट्रकों को प्लांट के अंदर ले जाने के बाद धीरे-धीरे गैस को निकालकर बुलेट टैंकों में भरा गया। जब वे टैंक भर गए, तो गैस को निजी टैंकरों में शिफ्ट किया गया और कुछ हिस्से को बिना पक्के बिल के बाजार में भी बेच दिया गया।
8 दिनों में खाली किए गए कैप्सूल
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 8 दिनों के भीतर सभी कैप्सूल ट्रकों से गैस को खाली कर दिया गया। इन ट्रकों को प्लांट के बुलेट टैंकों और टैंकरों में स्थानांतरित किया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में गैस का अचानक “लीकेज” होना तकनीकी रूप से संभव नहीं है, जिससे यह साफ होता है कि गैस को जानबूझकर निकाला गया। इसके अलावा, 200 किलोमीटर के रास्ते में कई वजन कांटे (धर्मकांटे) होने के बावजूद किसी भी स्थान पर ट्रकों का वजन नहीं कराया गया, जिससे संदेह और गहरा गया।

दस्तावेजों में गड़बड़ी, चौंकाने वाली रिपोर्ट
जांच में एक और बड़ा खुलासा हुआ कि कंपनी के रिकॉर्ड में गंभीर अनियमितताएं थीं। दस्तावेजों के अनुसार अप्रैल महीने में कंपनी ने केवल 47 टन LPG खरीदी थी, लेकिन बिक्री का रिकॉर्ड 107 टन दिखाया गया। इसका मतलब यह है कि करीब 60 टन गैस का अंतर सामने आया, जो या तो अवैध बिक्री का संकेत है या फिर रिकॉर्ड में भारी हेराफेरी का।
वहीं, राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की मदद से की गई जांच में यह पाया गया कि LPG कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित थे और किसी भी तरह का बड़ा रिसाव संभव नहीं था। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि बिना किसी दुर्घटना या बड़े तकनीकी फेलियर के इतने टन गैस का गायब होना असंभव है। इससे यह निष्कर्ष निकला कि गैस को योजनाबद्ध तरीके से निकाला गया।
सबूत मिटाने और रिकॉर्ड गायब करने का आरोप
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के कार्यालय से महत्वपूर्ण रजिस्टर और दस्तावेज गायब कर दिए गए। खासकर अप्रैल महीने का बिना बिल वाला रिकॉर्ड नष्ट या गायब कर दिया गया, जिससे अवैध लेन-देन को छिपाने की कोशिश की गई। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने सबूतों को मिटाने और जांच को प्रभावित करने की कोशिश भी की, जिसके आधार पर अतिरिक्त धाराएं जोड़ी गई हैं।

अब तक पुलिस ने कंपनी के एक कर्मचारी निखिल वैष्णव को गिरफ्तार किया है। वहीं, मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर, डायरेक्टर साकिन ठाकुर और प्लांट मैनेजर फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
Varsha Shrivastava 
