Iran-United States टकराव जारी, होर्मुज नाकेबंदी तेज, United Arab Emirates ने OPEC छोड़ा, तेल बाजार में हलचल
Iran-United States तनाव जारी है, होर्मुज पर नाकेबंदी बनी हुई। United Arab Emirates के OPEC छोड़ने से तेल बाजार में हलचल है, जबकि भारत को सस्ते तेल की उम्मीद के साथ अनिश्चितता बनी हुई है।
ईरान ने साफ कहा है कि उसके लिए मौजूदा हालात अब भी जंग जैसे बने हुए हैं। ईरानी सेना के प्रवक्ता ने प्रेस टीवी को दिए बयान में कहा, युद्ध अभी खत्म नहीं हुआ है। हम मौजूदा स्थिति को सामान्य नहीं मानते। सेना और सुरक्षा एजेंसियां लगातार मॉनिटरिंग और सर्विलांस कर रही हैं। ईरान ने दुश्मनों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर कोई नई कार्रवाई हुई, तो उसे नए हथियारों, नए तरीकों और नए मोर्चों पर जवाब दिया जाएगा। तेहरान में हाल ही में आयोजित मिसाइल प्रदर्शनी इस मजबूती का प्रतीक मानी जा रही है।
ईरान-अमेरिका तनाव: बातचीत अटकी, नाकेबंदी जारी..
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध फरवरी 2026 में शुरू हुआ था, जिसमें इजराइल भी शामिल रहा। अप्रैल की शुरुआत में पाकिस्तान की मध्यस्थता से अस्थायी संघर्षविराम हुआ, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर दोतरफा नाकेबंदी (Dual Blockade) बनी हुई है। ईरान ने होर्मुज पर जहाजों की आवाजाही सीमित कर रखी है, जबकि अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी लगा रखी है। ईरान ने अमेरिका को प्रस्ताव दिया था कि होर्मुज खोल दिया जाए और जहाजों की आवाजाही शुरू हो, जिसके बदले परमाणु मुद्दे पर बाद में बात की जा सके। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। ट्रंप का कहना है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने साफ कहा, हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत कभी नहीं देंगे।
NOW - Trump: "We have militarily defeated [Iran]." pic.twitter.com/AKZ1F8b7fe
— Disclose.tv (@disclosetv) April 29, 2026
बातचीत में मुख्य अड़चनें..
- परमाणु कार्यक्रम:
अमेरिका चाहता है कि ईरान इसे पूरी तरह बंद करे, जबकि ईरान 5 साल की सीमा तक तैयार है। - एनरिच्ड यूरेनियम:
ईरान के पास मौजूद स्टॉक अमेरिका को सौंपने से इनकार। - होर्मुज:
ईरान कहता है कि नाकेबंदी हटे तभी रास्ता खुल सकता है। - फ्रोजन एसेट्स और हर्जाना:
ईरान 20 अरब डॉलर की जमा राशि और 270 अरब डॉलर के युद्ध नुकसान का मुआवजा मांग रहा है। - क्षेत्रीय प्रभाव:
ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हमास) पर अमेरिकी दबाव।
ईरान ने अमेरिका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में शिकायत भी दर्ज कराई है और उसे समुद्री डकैती बताया है।
UAE का ओपेक से 59 साल बाद ऐतिहासिक अलगाव..
इस तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई 2026 से ओपेक और ओपेक+ से बाहर निकलने की घोषणा कर दी। यह कदम 1967 से चले आ रहे सदस्यत्व को खत्म करेगा। UAE का कहना है कि अब वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार तेल उत्पादन और बिक्री करेगा।

OPEC छोड़ने के कारण..
- उत्पादन कोटा बढ़ाने की मांग पर सऊदी अरब से मतभेद।
- युद्ध के दौरान सुरक्षा और सप्लाई पर ओपेक का अपर्याप्त समर्थन।
- अब स्वतंत्र रूप से ज्यादा तेल निकालकर बाजार में सप्लाई बढ़ाना।
तेल बाजार पर असर:
ब्रेंट क्रूड की कीमतें पहले ही 110 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी हैं। UAE के बाहर निकलने से आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है, जिससे कीमतें गिर सकती हैं।
भारत के लिए अवसर और चुनौतियां..
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों को इस स्थिति से फायदा हो सकता है। UAE अब अपनी शर्तों पर तेल बेच सकेगा और भारत को डिस्काउंट या लचीली भुगतान शर्तें दे सकता है। अबू धाबी क्रूड ऑयल पाइपलाइन के जरिए होर्मुज बायपास करके फुजैरा बंदरगाह तक तेल पहुंचाया जा सकता है, जिससे भारत के पश्चिमी तट तक दूरी और समय दोनों कम होंगे। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तेल की कीमत में $1 प्रति बैरल की गिरावट से भारत का आयात बिल करीब 10,000 करोड़ रुपये कम हो सकता है। सालाना बचत ₹50,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक हो सकती है।

ईरान की आर्थिक स्थिति गंभीर..
ईरान सरकार के अनुसार युद्ध की वजह से देश में सीधे 10 लाख नौकरियां खत्म हो चुकी हैं और भविष्य में 1 करोड़ से ज्यादा नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। अमेरिकी नाकेबंदी के कारण ईरान के पास तेल स्टोरेज केवल 22 दिन बचा है। अगर उत्पादन जारी रहा तो जल्द ही कटौती करनी पड़ सकती है, जिससे पुराने तेल कुओं का प्राकृतिक दबाव कम होने का खतरा है। ट्रंप प्रशासन ईरान पर लंबी नाकेबंदी की तैयारी कर रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि आर्थिक दबाव बनाए रखा जाए।
क्षेत्रीय कूटनीति और पाकिस्तान का रोल..
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस के बाद पाकिस्तान पहुंचे। यह उनका पिछले 48 घंटों में तीसरा दौरा है। ईरान पाकिस्तान के माध्यम से मध्यस्थों को नया प्रस्ताव देने की तैयारी कर रहा है। ईरान के अंतिम शाह के बेटे रेजा पहलवी ने कहा कि ईरानी सरकार कमजोर हुई है और अब दबाव बढ़ाने का समय है। उन्होंने सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने और लोगों के विरोध को बढ़ावा देने की बात कही।

आगे क्या..
ट्रंप प्रशासन वार पावर्स रेजोल्यूशन के तहत 1 मई तक संसद से मंजूरी लेने की समयसीमा के करीब है। अगर मंजूरी नहीं मिली तो कानूनी रूप से सैन्य कार्रवाई खत्म करनी चाहिए, लेकिन कई राष्ट्रपति पहले भी इसे टाल चुके हैं। विश्व बाजार में तेल की कीमतें सातवें दिन भी बढ़ी हैं। UAE के ओपेक से बाहर निकलने से कार्टेल की कीमत नियंत्रण क्षमता कमजोर होगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। ईरान का बयान साफ संकेत देता है कि संघर्ष अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हैं। होर्मुज की स्थिति, परमाणु मुद्दा और आर्थिक नाकेबंदी वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं। भारत सहित कई देश सस्ते तेल की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन पूर्ण शांति बहाल होने तक अनिश्चितता बनी रहेगी।

