जानवरों की तरह काम करवा रहे कलेक्टर? सख्ती से टूटा कम्फर्ट जोन, तो ‘प्रेशर’ बताकर भड़के कर्मचारी
रीवा में नए कलेक्टर वैभव कुमार सूर्यवंशी के आने के बाद काम को लेकर सख्ती बढ़ गई है। देर से आने, काम लंबित रखने और लापरवाही पर कार्रवाई हो रही है। इसी को लेकर कुछ कर्मचारी नाराज होकर विरोध कर रहे हैं और हड़ताल की चेतावनी भी दी है।
रीवा में नवागत कलेक्टर वैभव कुमार सूर्यवंशी का काम के प्रति सख्त रवैया को लेकर कर्मचारियों में नाराजगी देखने को मिल रही है। कलेक्टर के आने के बाद से जिला प्रशासन में लगातार सख्ती बढ़ गई है, जिसको लेकर कई कर्मचारी विरोध में उतर आए हैं।
दरअसल, कर्मचारियों का कहना है कि जब से नए कलेक्टर ने पद संभाला है, तब से लगातार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की जा रही है। कभी किसी का वेतन काट दिया जाता है, तो कभी लापरवाही पर सख्त फटकार लगाई जाती है।

देर से आने पर डांट पड़ती है और कई मामलों में अधिकारियों को सस्पेंड या टर्मिनेट भी किया गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि इस तरह की लगातार कार्रवाई से उन पर बेवजह का दबाव बनाया जा रहा है।
कार्मचारी के बीमार पड़ने से विरोध शुरू
इसी दबाव के बीच बुधवार को कलेक्ट्रेट में एक बैठक के दौरान एक महिला कर्मचारी की तबीयत बिगड़ गई। बताया जा रहा है कि मीटिंग के दौरान उन्हें पैनिक अटैक आया और वो बेहोश हो गईं। इसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया गया। इस घटना के बाद कर्मचारियों का गुस्सा खुलकर सामने आ गया।
गुरुवार को बड़ी संख्या में कर्मचारी एकजुट होकर कलेक्टर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए संभागीय कमिश्नर को ज्ञापन देने पहुंचे। इस दौरान कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की और जिला प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया।

बताया जा रहा है कि इस विरोध में सबसे ज्यादा ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारी शामिल हैं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे और कलेक्टर के रवैये में बदलाव नहीं आया तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।
कम्फर्ट जोन पर बात आई
दरअसल, कलेक्टर के आने के बाद जिले में कामकाज को लेकर सख्ती बढ़ी है। अधिकारियों और कर्मचारियों को समय पर दफ्तर आने, लंबित फाइलें निपटाने और योजनाओं को तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। कई विभागों में पहले से लंबित पड़े कामों को तेजी से पूरा करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

बताया जा रहा है कि कई कर्मचारी पहले आरामदायक तरीके से काम करने के आदी हो चुके थे। दफ्तरों में लेटलतीफी, काम को टालना और फाइलों को लंबित रखना आम बात बन चुकी थी। ऐसे में जब अचानक सख्ती शुरू हुई और तो कुछ कर्मचारियों को ये अपने कंफर्ट जोन से बाहर लगने लगा।

सूत्रों के मुताबिक, जिन विभागों में लंबे समय से कामकाज बेहद धीमा था, वहीं अब सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिल रहा है। कई कर्मचारी अचानक बढ़े काम और जवाबदेही से असहज महसूस कर रहे हैं और इसी वजह से विरोध का माहौल बनाया जा रहा है।
जिले में जल संवर्धन और विकास से जुड़े कई काम लंबे समय से पीछे चल रहे थे। रिपोर्ट के मुताबिक इन योजनाओं में रीवा की स्थिति प्रदेश में काफी नीचे बताई जा रही थी। ऐसे में प्रशासन अब तेजी से काम पूरा कराने में लगा है।
कलेक्टर ने क्या कहा?
पूरे मामले पर कलेक्टर वैभव कुमार सूर्यवंशी का कहना है कि हर अधिकारी और कर्मचारी का काम है कि वह ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने कहा कि अगर किसी कर्मचारी को कोई समस्या है तो वह सीधे उनसे आकर बात कर सकता है, उसकी समस्या का समाधान किया जाएगा।

कलेक्टर ने यह भी कहा कि जिले में जल संवर्धन और जल संरक्षण से जुड़े काम काफी पीछे चल रहे थे। इसी वजह से प्रदेश में रीवा की रैंकिंग काफी नीचे, लगभग 52वें स्थान पर थी। इसी कारण बुधवार को मैंने नाराजगी जताई। उन्होंने साफ किया कि उनकी तरफ से किसी के साथ कोई आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

