BJP नेता का चालानी कार्रवाई से बचने के लिए हंगामा, सब-इंस्पेक्टर पर रौब दिखाया, सच आया सामने
महू नाका चौराहे पर हंगामा: इंदौर में ट्रैफिक चेकिंग के दौरान चालानी कार्रवाई को लेकर विवाद से बढ़ा तनाव
इंदौर के महू नाका चौराहे पर यातायात पुलिस द्वारा की गई नियमित चेकिंग के दौरान शुक्रवार को एक विवाद की स्थिति बन गई, जिसने कुछ समय के लिए इलाके का माहौल तनावपूर्ण कर दिया। यह मामला उस समय चर्चा में आ गया जब भाजपा के विधानसभा-4 के प्रभारी वीरेंद्र शेंडगे और ट्रैफिक पुलिसकर्मियों के बीच बहस हो गई। घटना के बाद दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं।

चेकिंग के दौरान शुरू हुआ विवाद
इंदौर में यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर चालानी कार्रवाई के दौरान भाजपा नेता वीरेंद्र शेंडके द्वारा पुलिस पर दबाव बनाने और हंगामा करने का मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, फिक पुलिस महू नाका चौराहे पर हेलमेट और यातायात नियमों की जांच कर रही थी। इसी दौरान वीरेंद्र शेंडगे की गाड़ी को रोका गया। उप निरीक्षक लक्ष्मी धारवे और एक आरक्षक ने वाहन रोककर चालानी कार्रवाई की तो भाजपा नेता ने पुलिसकर्मियों पर मारपीट का आरोप लगाते हुए अपने समर्थकों के साथ महूनाका क्षेत्र में चक्काजाम का प्रयास किया।

पुलिस का कहना है कि वाहन चलाते समय मोबाइल फोन के उपयोग और यातायात नियमों के उल्लंघन को लेकर चालानी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसी दौरान पुलिस और शेंडगे के बीच कहासुनी हो गई। मामला बढ़ते-बढ़ते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस में बदल गया।
दोनों पक्षों के अलग-अलग आरोप
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर दो तरह के बयान सामने आए हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पुलिसकर्मियों द्वारा शेंडगे के साथ अभद्र व्यवहार किया गया और स्थिति हाथ से बाहर चली गई। वहीं दूसरी ओर पुलिस का पक्ष है कि कार्रवाई केवल यातायात नियमों के पालन को लेकर की जा रही थी और किसी भी प्रकार की अनावश्यक घटना नहीं हुई। घटना के बाद दोनों पक्षों के समर्थक मौके पर एकत्रित हो गए, जिससे स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई।

चक्काजाम और विरोध प्रदर्शन
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने महू नाका चौराहे पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया और कुछ समय के लिए चक्काजाम की स्थिति बन गई। इस दौरान चौराहे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हुआ।
प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मामले में कार्रवाई की मांग की और पुलिस के खिलाफ नाराजगी जताई। हालांकि मौके पर पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति को संभालने की कोशिश की और लोगों को शांत कराया।

कथित मारपीट और वीडियो फुटेज का दावा
हालांकि, घटना के वीडियो फुटेज सामने आने के बाद मारपीट के दावों की पोल खुल गई। वीडियो में किसी प्रकार की मारपीट नहीं दिखाई दी, बल्कि चालानी कार्रवाई से बचने के लिए लोगों को इकट्ठा कर विरोध प्रदर्शन और चक्काजाम की कोशिश करते हुए देखा गया। मामले में जनप्रतिनिधियों को भी गुमराह करने का प्रयास किए जाने की बात सामने आई है।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई की। जांच के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों को फील्ड ड्यूटी से हटाकर कार्यालय में अटैच किया गया, जबकि कुछ पर निलंबन की कार्रवाई भी की गई।

ट्रैफिक विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। इस मामले में शिबेंदु जोशी ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज और सभी साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि पूरी घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
यातायात व्यवस्था पर असर
घटना के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनके नेता के साथ अनुचित व्यवहार हुआ, जबकि प्रशासन का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जारी है। इस दौरान कुछ समय के लिए क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रही, हालांकि बाद में हालात सामान्य कर दिए गए।
चक्काजाम और प्रदर्शन के कारण महू नाका चौराहे पर यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। कई वाहन लंबे समय तक जाम में फंसे रहे। बाद में पुलिस और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और यातायात को धीरे-धीरे सामान्य किया।
Varsha Shrivastava 
