सिंहस्थ 2028 की तैयारी शुरू: रेलवे,पुलिस और प्रशासन की बैठक; ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह बोले- वहां कोई तैयारी नहीं
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 को लेकर भोपाल में पुलिस, रेलवे, GRP, RPF और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की बड़ी बैठक।
उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी सिलसिले में भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय सभागार में पुलिस, रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की बड़ी बैठक आयोजित की गई। बैठक में सिंहस्थ के दौरान संभावित भारी भीड़, सुरक्षा व्यवस्था, रेलवे संचालन और आधारभूत सुविधाओं को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। अधिकारियों ने साफ कहा कि इस बार आयोजन को आधुनिक तकनीक, बेहतर समन्वय और वैज्ञानिक योजना के आधार पर संचालित किया जाएगा।

बैठक में यह भी बताया गया कि सिंहस्थ 2028 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। वहीं शाही स्नान के दिनों में एक ही दिन में लगभग 5 करोड़ लोगों की मौजूदगी का अनुमान लगाया गया है। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए सरकार और प्रशासन ने अभी से व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। बैठक में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक ए. साईं मनोहर, ADG रेल भोपाल राजाबाबू सिंह, राकेश गुप्ता, कमिश्नर उज्जैन आशीष सिंह, कलेक्टर उज्जैन रोशन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक डॉ आशीष, उप पुलिस महानिरीक्षक नवनीत भसीन, तरुण नायक सहित उत्तरप्रदेश रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ, पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा- कोई तैयारी नहीं
ADG रेल भोपाल राजा बाबू सिंह ने कहा कि भोपाल में बहुत जरूरी कॉन्फ्रेंस में शामिल हुआ था। जिसमें DGP MP, DG RPF, DRM भोपाल, DRM रतलाम, ADRM झांसी के अलावा RPF के चार IG IG RPF भोपाल, IG RPF मुंबई, IG RPF प्रयागराज, IG RPF कोलकाता उपस्थित थे। कमिश्न उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, ADG-IG उज्जैन और पुलिस अधीक्षक DIG भी मौजूद थें। DGP रेलवे उत्तर प्रदेश ने प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभव बताए।

राजा बाबू सिंह ने कहा हमारी जो GRP इकाई इंदौर है, जिस पर सिंहस्थ 2028 का जिम्मा होगा उसने कोई होमवर्क नहीं किया है। वहां, पुलिस अधीक्षक, 2 DSP उज्जैन और रतलाम के पद रिक्त हैं। सिंहस्थ 2028 को लेकर जो अस्थायी थाने और चौकी या मेला क्षेत्र बनेंगे उसके लिए अभी से अतिरिक्त बल मिल जाना चाहिए, जो अभी तक नहीं मिला है।
प्रयागराज महाकुंभ से सीख, इस बार ज्यादा फोकस क्राउड मैनेजमेंट पर
बैठक में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने कहा कि प्रयागराज महाकुंभ 2025 के अनुभवों से सीख लेते हुए इस बार सिंहस्थ में भीड़ प्रबंधन को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि रेलवे, जीआरपी, आरपीएफ और जिला प्रशासन के बीच मजबूत समन्वय जरूरी है, क्योंकि श्रद्धालुओं की संख्या पिछले आयोजनों की तुलना में अधिक हो सकती है।
उन्होंने निर्देश दिए कि प्रमुख स्टेशनों और मेला क्षेत्र में अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मार्ग बनाए जाएं ताकि भीड़ का दबाव कम किया जा सके। साथ ही रेलवे स्टेशनों पर अंतिम समय में प्लेटफॉर्म बदलने से बचने के निर्देश भी दिए गए, क्योंकि इससे अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

AI और CCTV से होगी निगरानी
सिंहस्थ 2028 में पहली बार बड़े स्तर पर AI आधारित क्राउड मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी है। बैठक में निर्णय लिया गया कि सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों, होल्डिंग एरिया, पार्किंग और मेला क्षेत्र में CCTV कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर यानी ICCC से जोड़ा जाएगा।
यह कंट्रोल सेंटर रियल टाइम मॉनिटरिंग करेगा और किसी भी असामान्य स्थिति की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। इसके अलावा पब्लिक एड्रेस सिस्टम, डिजिटल साइन बोर्ड और कलर कोडिंग जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जाएंगी ताकि श्रद्धालुओं को आसानी से दिशा-निर्देश मिल सकें।

रेलवे ने बनाई विशेष रणनीति
बैठक में रेलवे अधिकारियों ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान बड़ी संख्या में विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी। 2016 के सिंहस्थ की तुलना में इस बार तीन गुना ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही छोटी दूरी की मेला ट्रेनें, डायनेमिक टाइम टेबल, डबल इंजन वाली ट्रेनें और दिशा आधारित प्लेटफॉर्म व्यवस्था लागू की जाएगी। लंबी दूरी की कुछ ट्रेनों का पहले से डायवर्जन भी तय किया जाएगा ताकि मुख्य रूट पर दबाव कम किया जा सके।
रेलवे द्वारा उज्जैन, इंदौर, रतलाम, भोपाल, ओंकारेश्वर रोड और सीहोर के स्टेशनों पर विशेष तैयारी की जा रही है। यहां नए फुटओवर ब्रिज, अतिरिक्त प्लेटफॉर्म, सैटेलाइट स्टेशन और साइडिंग लाइन विकसित की जाएंगी।

घाटों का विस्तार और बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार
उज्जैन पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने प्रस्तुतीकरण देते हुए बताया कि सिंहस्थ का आयोजन 9 अप्रैल से 8 मई 2028 तक प्रस्तावित है। मेले के लिए लगभग 3100 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घाटों का विस्तार करीब 37 किलोमीटर तक किया जाएगा ताकि श्रद्धालुओं को स्नान में सुविधा मिल सके।
वैज्ञानिक तरीके से यह आकलन किया जा रहा है कि एक निश्चित समय में एक किलोमीटर घाट पर कितने श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से स्नान कर सकते हैं। प्रशासन ने यह भी माना है कि इंदौर-देवास मार्ग से सबसे ज्यादा यातायात रहेगा। इसी को देखते हुए सड़क और पार्किंग व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई गई है।

सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश
बैठक में जीआरपी और आरपीएफ अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए। सभी स्टेशनों और भीड़ वाले इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की जाएगी। इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करने और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अलग-अलग एजेंसियों के बीच लगातार समन्वय बनाए रखा जाएगा।
सोनाली मिश्रा ने कहा कि बड़े धार्मिक आयोजनों में आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों महत्वपूर्ण होती हैं। इसलिए रेलवे जोनों और सुरक्षा एजेंसियों के बीच लगातार संवाद और संयुक्त प्रशिक्षण जरूरी है।

आपात स्थिति से निपटने की भी तैयारी
सिंहस्थ के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए मेडिकल टीम, एनडीआरएफ और त्वरित प्रतिक्रिया दलों की तैनाती की जाएगी। सभी प्रमुख स्थानों पर बैकअप पावर सिस्टम और आपातकालीन सहायता केंद्र बनाए जाएंगे।
अधिकारियों ने कहा कि इस बार तकनीक, बेहतर योजना और विभिन्न विभागों के समन्वय के जरिए सिंहस्थ 2028 को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
Varsha Shrivastava 
