Delhi PG Hostel Collapse : दिल्ली की सभी बिल्डिंग्स की होगी जांच, MCD ने 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

Delhi PG Hostel Collapse : MCD के अनुसार, इस साल की शुरुआत में हुए सर्वे के दौरान दिल्ली की 27 लाख 84 हजार 286 इमारतों की जांच की गई थी। इनमें केवल 19 इमारतों को खतरनाक पाया गया था।

Delhi PG Hostel Collapse : दिल्ली की सभी बिल्डिंग्स की होगी जांच, MCD ने 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

Delhi PG Hostel  Collapse : नई दिल्ली राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने के बाद नगर निगम ने बड़ा फैसला लिया है। MCD ने पूरी दिल्ली में इमारतों की जांच कराने के आदेश दिए हैं। सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों को अपने इलाके की इमारतों का निरीक्षण करने को कहा गया है। अधिकारियों को 10 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट जमा करनी होगी। यह कदम सत्य निकेतन हादसे में सात लोगों की मौत और छह लोगों के घायल होने के बाद उठाया गया है।

हाईकोर्ट में दाखिल होगा जांच का ब्योरा

MCD की ओर से कराए जा रहे निरीक्षण में इमारतों की स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटाई जाएगी। इस जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल होने वाले हलफनामे में शामिल किया जाएगा। यह हलफनामा 10 दिन के भीतर अदालत में जमा किया जाना है।

मामले में अगली सुनवाई 25 सितंबर को होगी। MCD के अनुसार, इस साल की शुरुआत में हुए सर्वे के दौरान दिल्ली की 27 लाख 84 हजार 286 इमारतों की जांच की गई थी। इनमें केवल 19 इमारतों को खतरनाक पाया गया था।

बिल्डिंग हादसे में तीन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें प्रॉपर्टी मालिक उर्मिला गुप्ता, उनके पति हरिराम गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार, संपत्ति उर्मिला गुप्ता के नाम पर दर्ज है। हालांकि, इसका प्रबंधन और संचालन उनके पति और बेटे के पास था। पुलिस अब PG संचालकों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की भूमिका की भी जांच कर रही है।

दंपती को 14 दिन की न्यायिक हिरासत

तीनों आरोपियों को सोमवार रात पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस हिरासत मिली है।

पुलिस हादसे से जुड़े दूसरे लोगों की भी तलाश कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि इमारत के निर्माण, रखरखाव और संचालन में किस स्तर पर लापरवाही हुई।

28 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

सत्य निकेतन में बिल्डिंग गिरने के बाद करीब 28 घंटे तक राहत और बचाव अभियान चला। रेस्क्यू टीम ने मलबे से 12 लोगों को बाहर निकाला। हादसे में सात लोगों की मौत हुई है। मृतकों में अभिषेक कुमार, अर्पित जाज, युवराज सोनी, पवन कुमार, सुरेंद्र सिंह, अक्षत सिंह और परम लाल कोरी शामिल हैं। हादसे में घायल तीन लोगों की हालत गंभीर बताई गई है।

MCD के पांच अधिकारी सस्पेंड

हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार को सस्पेंड कर दिया। उनके अलावा चार इंजीनियरिंग अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है। इन अधिकारियों को विभागीय जांच पूरी होने तक निलंबित रखा गया है।

इसके बाद IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया। सौरभ 2016 बैच के AGMUT कैडर के अधिकारी हैं और फिलहाल साउथ वेस्ट जोन के डिप्टी कमिश्नर हैं।

300 मकानों में करीब 170 में चल रहे PG

सत्य निकेतन को 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसाया गया था। बाद में 1970 के दशक में दिल्ली यूनिवर्सिटी का साउथ कैंपस शुरू हुआ। इसके बाद इलाके में छात्रों की संख्या बढ़ी और कई मकान PG में बदल गए।

मौजूदा समय में यहां करीब 300 मकान हैं। इनमें लगभग 170 मकानों में PG चलने की जानकारी है। विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली की कई पुरानी इमारतें अतिरिक्त मंजिलों का भार उठाने के हिसाब से तैयार नहीं की गई थीं।

अवैध निर्माण पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

हादसे के बाद दिल्ली में चार मंजिल से अधिक वाले अवैध निर्माण को तत्काल सील करने की बात कही गई है। लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। सत्य निकेतन हादसे की मजिस्ट्रेट जांच कराने का फैसला लिया गया है।

जर्जर और खतरनाक इमारतों पर उन्हें गिराने से जुड़े नोटिस लगाए जा रहे हैं। हादसे वाली इमारत के पास मौजूद एक दूसरी बिल्डिंग को भी खाली कराया गया है और उसे सपोर्ट देने के लिए पिलर लगाए गए हैं।

PG हब की इमारतों का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट

दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू (Taranjit Singh Sandhu) ने PG हब की सभी इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट एक सप्ताह में पूरा कराने का आदेश दिया है। हादसे के बाद प्रशासन का फोकस पुरानी और कमजोर इमारतों की पहचान करने तथा अवैध निर्माण पर कार्रवाई करने पर है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।