भोपाल में न्यू मित्र मंडल सहकारी संस्था घोटाला: 25 साल की अनियमितताओं के बाद EOW ने दर्ज की FIR

न्यू मित्र मंडल गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित घोटाला। 25 साल के भ्रष्टाचार का खुलासा। करोड़ों की धोखाधड़ी। 17 लोगों पर मामला दर्ज। 

भोपाल में न्यू मित्र मंडल सहकारी संस्था घोटाला: 25 साल की अनियमितताओं के बाद EOW ने दर्ज की FIR

भोपाल। राजधानी में संचालित न्यू मित्र मंडल गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित से जुड़े करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले का खुलासा होने के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ा कदम उठाया है। 8 दिसंबर 2025 को पीड़ित सदस्य  अर्जुन वाधवानी और अन्य सदस्यों की लिखित शिकायत पर प्रारंभ हुई जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं, धोखाधड़ी और गबन के पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद EOW, भोपाल ने FIR क्रमांक 36/26 दर्ज की है।

1981 में स्थापना, मध्यमवर्गीय परिवारों का सपना

संस्था की स्थापना वर्ष 1981 में इस उद्देश्य से की गई थी कि मध्यमवर्गीय और सामान्य आर्थिक पृष्ठभूमि के परिवारों को आवासीय भूखंड उपलब्ध कराए जा सकें। संस्था ने ग्राम बागमुगालिया, भोपाल स्थित खसरा क्रमांक 454/1 की लगभग 3.5 एकड़ भूमि सदस्यों से एकत्रित धनराशि से खरीदी थी। कुल 100 सदस्यों को भूखंड आवंटित करने की योजना बनाई गई थी।

सड़क निर्माण में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा

जांच में सामने आया कि वर्ष 1996 में उक्त भूमि का लगभग 2 एकड़ हिस्सा सड़क निर्माण के लिए शासन द्वारा अधिग्रहित कर लिया गया। इसके बदले संस्था को मुआवजा, वैकल्पिक भूमि और एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) का लाभ दिया गया। आरोप है कि इस मुआवजे और लाभ का वितरण मूल सदस्यों को नहीं किया गया और न ही इसके उपयोग का स्पष्ट लेखा-जोखा प्रस्तुत किया गया।

2004 में 45 प्लॉट की स्वीकृति, फिर भी बढ़ाई सदस्य संख्या

संस्था को वर्ष 2004 में केवल 45 प्लॉट विकसित करने की स्वीकृति मिली थी। 8 अप्रैल 2004 को टीएनसीपी भोपाल से 45 प्लॉट के लिए नक्शा पास कराया गया और 11 जनवरी 2005 को नगर निगम भोपाल से कॉलोनी विकास की अनुमति प्राप्त की गई।

लेकिन जांच में पाया गया कि स्वीकृत प्लॉट संख्या के विपरीत संस्था के पदाधिकारियों ने 45 से अधिक सदस्यों को अवैध रूप से जोड़ा। प्राथमिकता सूची का उल्लंघन करते हुए पुराने सदस्यों के नाम हटाकर नए सदस्यों को शामिल किया गया।

अवैध सदस्य जोड़ने की श्रृंखला

जांच के अनुसार:

  • वर्ष 2005-06 में 19 नए सदस्य जोड़े गए।
  • वर्ष 2006-07 में 3 पुराने सदस्यों को हटाकर 9 नए सदस्य बनाए गए।
  • वर्ष 2007-08 में 44 नए सदस्य अवैध रूप से शामिल किए गए।
  • इस प्रकार स्वीकृत 45 प्लॉट के बावजूद सदस्य संख्या बढ़ाकर मनमानी तरीके से भूखंडों का आवंटन और विक्रय किया गया।

2023 में नक्शे में अवैध संशोधन

सबसे गंभीर आरोप साल 2023 से जुड़े हैं। जांच में पाया गया कि मूल 2004 के नक्शे में अवैध बदलाव कर आवासीय भूखंडों को व्यवसायिक उपयोग के रूप में दर्शाया गया। 30 जनवरी 2023 को टीएनसीपी से नया नक्शा पास कराया गया, जिसमें भूखंडों के आकार और उपयोग में परिवर्तन किया गया। आरोप है कि यह बदलाव करोड़ों रुपये के लाभ के उद्देश्य से किया गया।

28 रजिस्ट्रियों में कम मूल्य दर्शाकर विक्रय

वर्ष 2023 से 2024 के बीच 28 भूखंडों की रजिस्ट्री की गई। इन रजिस्ट्रियों में वास्तविक बाजार मूल्य छिपाकर अत्यंत कम मूल्य दर्शाया गया। जांच में सामने आया कि संस्था को लगभग 8.84 से 9 करोड़ रुपये की प्रत्यक्ष हानि हुई।

शासन को लगभग 4 से 5 करोड़ रुपये की स्टाम्प एवं राजस्व शुल्क की हानि पहुंची। यदि बाजार मूल्य के आधार पर गणना की जाए तो कुल लेनदेन लगभग 40 करोड़ रुपये का हो सकता है। आरोप है कि विक्रय से प्राप्त राशि संस्था के खाते में जमा नहीं कराई गई और उसका गबन कर लिया गया।

मूल सदस्यों के साथ धोखाधड़ी

जांच में यह भी सामने आया कि कई मूल सदस्यों ने वर्षों तक किस्तों में राशि जमा की थी और उन्हें आवंटन पत्र भी जारी किए गए थे। इसके बावजूद उन्हें भूखंड नहीं दिए गए। कुछ मामलों में उनके नाम पर आवंटित भूखंड अन्य व्यक्तियों को बेच दिए गए।

सदस्यता क्रमांक 231 से 264 के बीच 28 अपात्र और गैर-सदस्यों को भूखंड विक्रय किए गए, जबकि संस्था में कुल 101 मूल सदस्य ही थे। यह सदस्यता क्रमांक स्वयं विक्रय पत्रों में दर्ज पाए गए।

रिकॉर्ड में अनियमितताएं और दस्तावेज गायब

जांच में संस्था के मीटिंग मिनट्स, लेखा दस्तावेजों और रिकार्ड में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। कई महत्वपूर्ण अभिलेख अनुपलब्ध मिले। न्यायालय और सहकारिता विभाग में लंबित मामलों की जानकारी छिपाकर रजिस्ट्री कराए जाने के भी प्रमाण मिले हैं।

BNS 2023 के तहत मामला दर्ज

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर संगमलाल हासीजा (मृतक), नीलम हासीजा, पायल हासीजा, आई.के. चौधरी, अशफाक अहमद कुरैशी, मो. अफसर, नफीस, मूसा, शादाब अहमद कुरैशी, शाहबाज कुरैशी, फैजान अहमद, आशु अहमद, अशोक सूर्यवंशी, सोहेल अहमद, सुमन ठाकरे, सुलेखा चावला सहित अन्य अज्ञात पदाधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) (आपराधिक षड्यंत्र), 316(2) (धोखाधड़ी) और 318(4) (न्यासभंग एवं गबन) के तहत मामला दर्ज किया है।

25 वर्षों से चल रहा था खेल, जांच जारी

जांच में वर्ष 2004 से लेकर वर्तमान तक विभिन्न कालखंडों के अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, संचालकों और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की संलिप्तता पाई गई है। आरोप है कि पद का दुरुपयोग कर संस्था की भूमि को बाजार दर पर लाखों-करोड़ों रुपये में बेचने के लिए अवैध सदस्यों को जोड़ा गया और मूल सदस्यों को षड्यंत्रपूर्वक हटाया गया। EOW द्वारा मामले की विस्तृत जांच जारी है। वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। आने वाले समय में और खुलासे तथा गिरफ्तारी की कार्रवाई संभव है।