काले हिरण शिकार में वन विभाग की साजिश उजागर! रेंजर आशीष रावत समेत 6 वनकर्मी सस्पेंड
मध्य प्रदेश के सिवनी मालवा में दो काले हिरण शिकार केस में रेंजर आशीष रावत सहित 6 वनकर्मी निलंबित। प्राकृतिक मौत दिखाकर सबूत मिटाने की कोशिश ,वीडियो वायरल होने पर एक महीने बाद कार्रवाई
सिवनी मालवा वन परिक्षेत्र: 21 जनवरी 2026 को सिवनी मालवा वन परिक्षेत्र (बासनिया गांव के पास) में दो काले हिरणों का शिकार हुआ। शिकारी हिरणों को लेकर जा रहे थे, लेकिन ग्रामीणों को देखकर उन्हें छोड़कर भाग गए। वनकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर इसे 'प्राकृतिक मौत' बताने की कोशिश की। रेंजर आशीष रावत, वनपाल महेश गौर, वनरक्षक मनीष गौर, रूपक झा, ब्रजेश पगारे और पवन उइके ने मिलकर, मृत काले हिरण को जलाने की कोशिश की ताकि सबूत नष्ट हो जाएं। जीवित काले हिरण के पैर बांधकर बोरी में भरने की कोशिश की। ग्रामीणों ने पूरा सीन मोबाइल से रिकॉर्ड कर लिया और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने में 15 दिन लगे, फिर भी विभाग ने कोई तत्काल कार्रवाई नहीं की।
मुख्यालय से आए सख्त निर्देश:
आखिरकार वीडियो एपीसीसीएफ एल. कृष्णमूर्ति तक पहुंचा, तब मुख्यालय से सख्त निर्देश आए। सीसीएफ अशोक कुमार ने तत्काल जांच कराई। जांच रिपोर्ट में साफ हुआ,मौत प्राकृतिक नहीं, शिकार से हुई। घटनास्थल पर एक जीवित हिरण बंधे पैरों के साथ मिला, दूसरा मृत। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, पोस्टमार्टम और साक्ष्यों से शिकार साबित। महत्वपूर्ण सबूत नष्ट किए गए, जैविक नमूने भी सुरक्षित नहीं रखे गए।

इस लापरवाही और सबूत मिटाने की कोशिश पर रेंजर आशीष रावत सहित 6 वनकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। कार्रवाई में एक महीना लग गया, जो विभाग की सुस्ती को दिखाता है।
क्यों हुआ वायरल ये मामला?
काला हिरण (ब्लैकबक) शेड्यूल-1 में संरक्षित प्रजाति है, इसका शिकार गैर-कानूनी है और सजा गंभीर। वनकर्मियों का खुद शामिल होना और सबूत छिपाने की कोशिश ने पूरे वन विभाग की छवि खराब की। सोशल मीडिया पर #BlackbuckPoaching #SeoniMalwa #VanVibhagFail जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं।
अंत में:वन विभाग ने कार्रवाई तो की, लेकिन देरी से सवाल उठ रहे हैं, क्या असली शिकारियों की गिरफ्तारी होगी? क्या विभाग में और ऐसे मामले हैं? जांच आगे बढ़ रही है

