भोपाल सांसद आलोक शर्मा का दावा- NGO की विदेशी फंडिंग की जांच जरूरी, बोले- देशहित से समझौता नहीं
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में NGO की विदेशी फंडिंग को लेकर सवाल उठाए और फंड के स्रोत व इस्तेमाल की जांच पर जोर दिया।
भोपाल। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के मौके पर भोपाल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सांसद आलोक शर्मा ने NGO की विदेशी फंडिंग को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि देश में काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों को मिलने वाली विदेशी आर्थिक मदद की पारदर्शिता और उसके इस्तेमाल की जांच जरूरी है.

आलोक शर्मा ने कहा कि सामाजिक संस्थाओं के जरिए होने वाले काम का स्वागत है, लेकिन यदि किसी संगठन को विदेश से फंड मिल रहा है तो उसके स्रोत और इस्तेमाल की जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए. देशहित से जुड़े मामलों में किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता.

विदेशी फंडिंग को लेकर उठाए सवाल
सांसद ने NGO को मिलने वाली विदेशी फंडिंग के मुद्दे को राष्ट्रीय हित से जोड़ते हुए कहा कि विदेश से आने वाले पैसों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है, इसकी निगरानी जरूरी है. उन्होंने कहा कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को नियमों का उल्लंघन करने वाले संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए.
आलोक शर्मा भोपाल लोकसभा सीट से बीजेपी सांसद हैं और 2024 में 18वीं लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए थे.
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर कार्यक्रम
यह बयान विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम से जुड़ा है. इस दिन 1947 के विभाजन के दौरान जान गंवाने और विस्थापन झेलने वाले लोगों को याद किया जाता है. भोपाल में भी इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया.

आलोक शर्मा ने इस दौरान विभाजन के इतिहास और उससे जुड़े अनुभवों को याद करते हुए राष्ट्रीय एकता और सामाजिक समरसता बनाए रखने की बात कही. उनके आधिकारिक सोशल मीडिया पर भी विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस से जुड़े कार्यक्रम की जानकारी साझा की गई थी.
NGO के काम में पारदर्शिता पर जोर
सांसद ने कहा कि NGO और सामाजिक संस्थाएं समाज के लिए महत्वपूर्ण काम करती हैं, लेकिन उनके वित्तीय स्रोत और फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी है. विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है.

आलोक शर्मा का यह बयान ऐसे समय आया है जब विदेशी फंडिंग और NGO की गतिविधियों को लेकर देश में समय-समय पर बहस होती रही है. ऐसे में उनके बयान को राजनीतिक और सामाजिक दोनों नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

