धार भोजशाला मामले में इंदौर हाईकोर्ट में छठे दिन की सुनवाई, हिंदू पक्ष ने ‘संभ्रांग सूत्रधार’ का दिया हवाला
धार भोजशाला को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में जारी सुनवाई के अंतर्गत छठे दिन हिंदू पक्ष के वकीलों ने राजा भोज द्वारा लिखी गई पुस्तक संभरांग सूत्रधार को आधार बनाकर अपने तथ्य प्रस्तुत किए।
धार स्थित भोजशाला परिसर से जुड़े मामले की इंदौर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के छठे दिन भी बहस जारी रही। इस दौरान हिंदू पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष गोयल ने अपना पक्ष प्रस्तुत किया और राजा भोज द्वारा रचित मानी जाने वाली 13वीं शताब्दी की पुस्तक ‘संभ्रांग सूत्रधार’ का हवाला देते हुए कई तर्क रखे।
अधिवक्ता गोयल ने अदालत के समक्ष कहा कि उक्त ग्रंथ में धार्मिक मंदिरों और देवालयों के निर्माण के लिए 6:4 के अनुपात का उल्लेख मिलता है। उन्होंने दावा किया कि भोजशाला परिसर की संरचना में भी यही अनुपात देखने को मिलता है, जिसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट में भी दर्शाया गया है।
सुनवाई के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि मस्जिद की नींव से प्राप्त पत्थरों और ईंटों का विश्लेषण महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार, ग्रंथ में हवन कुंड के निर्माण में ईंटों के उपयोग का उल्लेख है, जबकि स्थल से मिली ईंटें और हवन कुंड में प्रयुक्त ईंटें एक ही भट्टे में बनी प्रतीत होती हैं।
गोयल ने आगे तर्क दिया कि इस्लामिक धार्मिक स्थलों में सामान्यतः धार्मिक आकृतियों या नामों का अंकन नहीं होता, जबकि भारत में कई ऐतिहासिक स्थलों पर पूर्व में देवालयों को बदलकर संरचनाएं बनाई गई हैं। उन्होंने इस संदर्भ में राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का भी उल्लेख किया और कहा कि उसमें भी ऐसे ऐतिहासिक और पुरातात्विक पहलुओं को महत्व दिया गया था।
इस सुनवाई के साथ दोनों प्रमुख हिंदू पक्षों की दलीलें पूरी हो चुकी हैं। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। अदालत में याचिकाकर्ता कुलदीप तिवारी सहित अन्य पक्ष भी मौजूद रहे।
Varsha Shrivastava 
