घंटों बैठे रहने से हो सकती है ये जानलेवा बीमारी
हम लगातार कई घंटों तक काम के सिलसिले में एक जगह बैठे रहते है, लेकिन यह हमारी हेल्थ को काफी प्रभावित करता है. देर तक एक जगह बैठने से दिल की कई बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
हमारे यहां कई ऐसी जॉब होती है जहां एम्प्लॉई को कई कई घंटे लगातार एक जगह बैठना पड़ता है, फिर चाहे वो कोई मीटिंग हो, सेमिनार हो या फिर कंप्यूटर के सामने काम करना हो। एम्प्लॉई अपना 100 परसेंट देने के लिए, बिना आराम किए घंटो तक एक ही जगह पर बैठकर काम करते है. लेकिन इससे आप अपने दिल को काफी नुकसान पहुंचाते है. लगातार घंटों बैठे रहने से हार्ट अटैक का रिस्क कई गुना बढ़ जाता है. सिर्फ़ दिल ही नहीं, शरीर के दूसरे कई अंगों को भी नुकसान पहुंचता है. इसलिए, अगर आप डेस्क जॉब करते हैं तो रोज़ 8-9 घंटे लगातार बैठने से सेहत को किस तरह का नुकसान पहुंचता है? क्या इससे दिल की बीमारियों जैसे हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ता है? ऑफिस में काम करने वाले लोग इस नुकसान से कैसे बच सकते हैं? घंटों बैठे रहने से सेहत को क्या नुकसान पहुंचता है? आइए जानते है.
एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति आधा-एक घंटा टहलता है. फिर 8 से 9 घंटे एक कुर्सी पर बैठकर काम करता है. इससे शरीर में खून का फ्लो धीमा हो जाता है. खासकर पैर की मांसपेशियों में, जिन्हें पिंडलियां (Calves) कहा जाता है. एक्टिविटी कम होने से वो कमज़ोर पड़ जाती हैं. पिंडलियों को सेकंड हार्ट यानी दूसरा दिल बोला जाता है. जो खून शरीर से दिल की तरफ जाता है, ये उसे संभालती हैं. अगर पिंडलियां ठीक से काम नहीं करेंगी, तो खून नीचे जमा होने लगेगा. इससे थक्के जम सकते हैं. घंटों बैठे रहने से दिल के अलावा भी सेहत को काफ़ी नुकसान पहुंचता है. जैसे 10% ब्रेस्ट कैंसर, 10% कोलन कैंसर, कमर दर्द और हड्डियों की दिक्कतें भी देर तक बैठे रहने से जुड़ी हैं.
क्या लगातार बैठे रहने से हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ता है?
लगातार बैठे रहने से हार्ट अटैक का ख़तरा बढ़ जाता है. ऐसा कई स्टडीज़ से पता चला है. टोटल सिटिंग टाइम में 2-3 चीज़ें देखी जाती हैं. जैसे अगर कोई काम करने के लिए नोएडा से गुरुग्राम तक जाता है. सफर के दौरान 2 से 3 घंटे बैठा रहता है. फिर 8 से 9 घंटे ऑफिस में बैठता है. खाली समय में 1-2 घंटा बैठकर व्यक्ति फोन भी चलाता है. ये सब जोड़कर व्यक्ति 12 से 14 घंटे बैठा रहता है. इससे शरीर में खून का फ्लो धीमा होता है. मेटाबॉलिक एक्टिविटी कम हो जाती है. इसे साइलेंट किलर की तरह देखा जाता है. माना जाता है कि शरीर सेविंग मोड में चला जाता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है. इंसुलिन सेंसेटिविटी बढ़ जाती है. कोलेस्ट्रॉल पर बुरा असर पड़ता है. ये सारे फैक्टर हार्ट अटैक के साथ-साथ स्ट्रोक का रिस्क भी बढ़ाते हैं.
ऑफिस में काम करने वालों के लिए टिप्स
- हर 30-40 मिनट बाद कुर्सी से उठकर 2 मिनट टहलें, ये खून का फ्लो सुधारने में मदद करता है.
- लंच करने के बाद 10 मिनट ज़रूर टहलें.
- लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें.
- अपने पास हमेशा पानी की बोतल रखें. खुद को हाइड्रेटेड रखें. लंबी मीटिंग्स में पता ही नहीं चलता कि आप कितना कम पानी पी रहे हैं. इससे थक्के जमने की प्रक्रिया बढ़ जाती है. इसलिए, हाइड्रेशन बहुत ज़रूरी है.
- जब भी कोई फोन आए, तो टहल-टहलकर बात करें.
- लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने से बचें.
- अपना टोटल सिटिंग टाइम कम करें.
- खूब चलें. इससे हार्ट अटैक का रिस्क कम होता है
- ध्यान दें किसी की सलाह को मानने से पहले डॉक्टर से एक बार ज़रूर संपर्क करें।
नोट- यह जानकारी केवल आलेखों पर आधारित है। ऊपर बताए गए किसी भी तरीके को अपनाने से पहले हेल्थ एक्सपर्ट से परामर्श जरूर लें।
shivendra 
