पब्लिक वाणी की खबर पर लगी मुहर: MP सरकार ने शिक्षकों का अवकाश एक सप्ताह बढ़ाया, 7 दिन और बढ़ सकता है
मध्यप्रदेश के करीब चार लाख शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पब्लिक वाणी द्वारा प्रमुखता से उठाई गई खबर पर अब सरकार की मुहर लग गई है।
भोपाल। मध्यप्रदेश के लाखों शिक्षकों के लिए बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। भीषण गर्मी को देखते हुए राज्य सरकार ने शिक्षकों के ग्रीष्मकालीन अवकाश को फिलहाल एक सप्ताह के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। खास बात यह है कि यदि आने वाले दिनों में गर्मी का असर कम नहीं हुआ तो अवकाश को सात दिन और बढ़ाया जा सकता है। लंबे समय से शिक्षक संगठन छुट्टियां बढ़ाने की मांग कर रहे थे। अब सरकार के इस फैसले पर मुहर लग गई है।
7 दिन बढ़ा, 7 दिन और बढ़ाया जा सकता है
मध्यप्रदेश के करीब चार लाख शिक्षकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। पब्लिक वाणी द्वारा प्रमुखता से उठाई गई खबर पर अब सरकार की मुहर लग गई है। राज्य सरकार ने भीषण गर्मी को देखते हुए शिक्षकों के ग्रीष्मकालीन अवकाश को फिलहाल एक सप्ताह के लिए बढ़ाने का निर्णय लिया है। यदि प्रदेश में तापमान का असर लगातार बना रहता है, गर्मी बढ़ती है और मौसम में राहत नहीं मिलती है तो अवकाश को सात दिन और बढ़ाया जा सकता है।

सरकार ने इसे लेकर आदेश जारी कर दिया है। शिक्षकों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 मई से 7 जून तक रहेगा। गौरतलब है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के अलावा शिक्षकों को सालभर में कुछ 26 छुट्टियां मिलती है। स्कूल शिक्षामंत्री राव उदय प्रताप सिंह के निर्देश पर विभाग के अफसरों ने ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने के प्रस्ताव् को तैयार किया।
ग्रीष्मकालीन अवकाश 1 मई से 31 मई तक निर्धारित था
दरअसल प्रदेश में शिक्षकों का ग्रीष्मकालीन अवकाश एक मई से 31 मई तक निर्धारित था। अवकाश समाप्त होने से ठीक पहले शिक्षक संगठनों ने सरकार से छुट्टियां बढ़ाने की मांग की थी। उनका कहना था कि इस बार गर्मी के दौरान भी शिक्षकों को वास्तविक अवकाश का लाभ नहीं मिल पाया, क्योंकि कई महत्वपूर्ण शासकीय कार्यों में उनकी ड्यूटी लगाई गई थी।
जानकारी के अनुसार मई महीने में माध्यमिक शिक्षा मंडल की दसवीं और बारहवीं की दूसरी बोर्ड परीक्षाएं आयोजित हुईं। इसके अलावा नवमीं और ग्यारहवीं की स्थानीय परीक्षाएं, मूल्यांकन कार्य, प्रवेश प्रक्रिया, प्रशिक्षण कार्यक्रम, मध्यान्ह भोजन से जुड़े कार्य तथा अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी शिक्षकों को लगाया गया। प्रदेश में जनगणना संबंधी गतिविधियों में भी बड़ी संख्या में शिक्षकों की भागीदारी रही। ऐसे में शिक्षक संगठनों का तर्क था कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बावजूद अधिकांश शिक्षक लगातार कार्यरत रहे हैं।
शिक्षक संगठनों ने स्कूल शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपा था
अपनी मांग को लेकर विभिन्न शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। मध्यप्रदेश शिक्षक संघ सहित कई संगठनों ने अवकाश बढ़ाने की मांग रखते हुए बताया था कि भीषण गर्मी के कारण विद्यालयी गतिविधियां तत्काल शुरू करना शिक्षकों और विद्यार्थियों दोनों के लिए कठिन हो सकता है।
सरकार ने इन मांगों और मौजूदा मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए शिक्षकों के अवकाश को एक सप्ताह के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। इसके साथ ही अधिकारियों को मौसम की लगातार समीक्षा करने के निर्देश भी दिए गए हैं। यदि अगले कुछ दिनों में तापमान सामान्य नहीं होता है तो अवकाश अवधि को आगे बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर शिक्षकों को अतिरिक्त सात दिन की राहत और मिल सकती है।
समय के साथ कटौती और छुट्टियों की अवधि कम होती चली गई
उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में शिक्षकों को पहले लगभग दो माह का ग्रीष्मकालीन अवकाश मिलता था, लेकिन समय के साथ इसमें कटौती की गई और छुट्टियों की अवधि कम होती चली गई। पिछले कुछ वर्षों में शिक्षकों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जाती रही है कि गर्मियों की छुट्टियों के दौरान उनसे लिए जाने वाले शासकीय कार्यों को देखते हुए अवकाश व्यवस्था की पुनर्समीक्षा की जाए।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब अवकाश अवधि के दौरान भी विभिन्न प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की सेवाएं ली जाती हैं तो उन्हें पर्याप्त विश्राम का अवसर नहीं मिल पाता। यही कारण है कि इस बार भी संगठनों ने छुट्टियां बढ़ाने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया था।
फिलहाल सरकार के इस निर्णय से प्रदेश के लाखों शिक्षकों को राहत मिली है। अब सभी की नजरें मौसम की स्थिति और सरकार के अगले निर्णय पर टिकी हुई हैं। यदि गर्मी का प्रकोप जारी रहता है तो अवकाश को और बढ़ाए जाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल शिक्षकों को एक सप्ताह की अतिरिक्त राहत मिल चुकी है और आगे के फैसले मौसम की परिस्थितियों के आधार पर लिए जाएंगे।
shivendra 
