एक्शन मोड में BJP प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं

उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण विवाद। बीजेपी विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा पर संगठन की नज़र। संगठन की समझाइश के बाद भी बागी तेवर। 

एक्शन मोड में BJP प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं

भोपाल। उज्जैन की पिपलीनाका विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा ने सड़क चौड़ीकरण के मुद्दे पर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने अब तक पहले दौर में समझाइश दी, लेकिन विधायक के बागी तेवर के कारण पार्टी पूरी तरह से नज़र बनाए हुए है। जानकारी के अनुसार, पार्टी इस मामले में विधायक के खिलाफ कड़ा एक्शन भी ले सकती है।

वर्तमान में बीजेपी में अनुशासन और संयम बनाए रखने के प्रयासों के बावजूद लगातार सत्ता में रहने के कारण अनुशासन में ढील दिखाई दे रही है। यही वजह है कि पार्टी फोरम के बाहर नेताओं के बयान सामने आ रहे हैं। पिछले साल पचमढ़ी में आयोजित ट्रेनिंग कैम्प में विधायकों और सांसदों को संवाद में संयम बरतने की खास हिदायत दी गई थी, लेकिन उसका असर लंबे समय तक नहीं रहा।

अनुशासनहीनता पर पार्टी की चिंता

कांग्रेस के मुकाबले बीजेपी नेताओं में अभी भी अनुशासन और संयम देखने को मिलता है, लेकिन अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलना उचित नहीं माना जाता। उज्जैन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का गृह क्षेत्र होने के कारण इस मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि पार्टी पहले समझाइश देती है और यदि स्थिति सुधरती नहीं है, तो कड़ा एक्शन भी लिया जा सकता है।

बीजेपी में अनुशासन के मामलों को लेकर अब कोई ढील नहीं दिखाई दे रही। उज्जैन जैसे मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र में अनुशासनहीनता किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में पार्टी द्वारा सख्त कार्रवाई अन्य विधायकों के लिए संदेश के रूप में काम कर सकती है।

विधायक अनिल जैन का विरोध

अनिल जैन कालूहेड़ा ने उज्जैन उत्तर विधानसभा क्षेत्र में पिपलीनाका के सड़क चौड़ीकरण कार्य के दौरान यह कहते हुए विरोध दर्ज कराया कि इलाके में जो परिवार रहते हैं, उनके मकान इस योजना के तहत टूट रहे हैं। उन्होंने कलेक्टर से इस योजना को संशोधित करने का अनुरोध किया, ताकि अधिक से अधिक मकान बचाए जा सकें।

विधायक का कहना है कि पिपलीनाका में सड़क चौड़ीकरण 24 मीटर की ही होगी और यदि ऐसा नहीं होता है, तो वह जनता के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे। इस सड़क चौड़ीकरण के तहत लगभग चार सौ घर प्रभावित हो रहे हैं, जिन्हें नोटिस के जरिए सात दिनों के भीतर खाली करने का निर्देश भी दिया जा चुका है।

पहले भी उज्जैन से उठे विरोध के स्वर

यह कोई पहला मामला नहीं है जब उज्जैन से बीजेपी के विधायक अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहे हैं। दो साल के भीतर दूसरी बार इस तरह का विरोध सामने आया है। इससे पहले विधायक चिंतामण मालवीय ने सिंहस्थ के दौरान किसानों की भूमि अधिग्रहित करने के फैसले का विरोध करते हुए सड़क और सदन तक आवाज उठाई थी। भारी विरोध के बाद सरकार ने उस अधिग्रहण फैसले को वापस ले लिया था।

संगठन की तैयारी और आगे की संभावनाएं

उज्जैन उत्तर से विधायक अनिल जैन को भोपाल बुलाकर मुख्यमंत्री निवास में बातचीत की गई। इस बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश प्रभारी डॉ. महेन्द्र सिंह और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मौजूद थे। विधायक को समझाया गया कि यदि कोई जनहित का मुद्दा था, तो उसे पार्टी फोरम में उठाया जाना चाहिए था। अनिल जैन ने इस बात की पुष्टि की कि वे जनता के हित में पूरी तरह सहयोग के लिए तैयार हैं।

पार्टी के अनुशासन नियमों के अनुसार, पहले समझाइश दी जाती है और यदि सुधार नहीं होता है, तो कड़ा एक्शन किया जाता है। उज्जैन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में यह अनुशासन और भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे न केवल वर्तमान विवाद का समाधान होगा, बल्कि अन्य विधायकों के लिए भी संदेश जाएगा कि पार्टी अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करती।