तमिलनाडु में BJP को बड़ा झटका, अन्नामलाई ने बनाई नई पार्टी; 2031 चुनाव लड़ने का ऐलान
तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भाजपा छोड़ने के कुछ दिनों बाद नई राजनीतिक पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है। अन्नामलाई ने कहा कि पिछले 18 महीनों से पार्टी नेतृत्व के साथ उनके मतभेद चल रहे थे और तमिलनाडु की राजनीति को लेकर उनके विचार अब भाजपा आलाकमान से मेल नहीं खाते।
चेन्नई। दक्षिण भारत की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) से इस्तीफा देने के ठीक बाद अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए अन्नामलाई ने कहा कि वे राज्य में एक नया राजनीतिक आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं, और उनकी नई पार्टी साल 2031 में तमिलनाडु का अगला विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
An Important Announcement https://t.co/IcEnfaZGRK
— K.Annamalai (@annamalai_k) June 5, 2026
4 दिसंबर को ही दे दिया था संकेत, आलाकमान के कहने पर रुके
अन्नामलाई का इस्तीफा पत्र शुक्रवार को सामने आया, जिससे यह साफ हो गया कि उन्होंने 2 जून को ही पार्टी छोड़ दी थी। इस्तीफा देने के बाद उन्होंने दिल्ली में गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात भी की थी।
अपने वीडियो संदेश में अन्नामलाई ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा, "मेरे लिए यह तय करना बेहद मुश्किल था कि मैं बीजेपी का सदस्य रहूं या तमिल लोगों से जुड़ा रहूं। मैंने 4 दिसंबर 2025 को ही पार्टी आलाकमान को अपने इस्तीफे की इच्छा बता दी थी। लेकिन पार्टी ने मुझसे चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक रुकने का आग्रह किया था, जिसके कारण मैं रुका रहा।"
इस्तीफे की 3 सबसे बड़ी वजहें:
आलाकमान से वैचारिक मतभेद:
अन्नामलाई ने स्पष्ट किया कि पिछले 18 महीनों से तमिलनाडु की राजनीति को आगे बढ़ाने के तौर-तरीकों को लेकर उनके और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच गहरे मतभेद चल रहे थे। अब दोनों के विचार एक जैसे नहीं रह गए थे।
बदलाव की लहर टिक नहीं पाई:
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जनता दशकों पुरानी घिसी-पिटी राजनीति से ऊब चुकी है। पिछले दशक में कई बार बदलाव की लहरें उठीं, लेकिन वे स्थायी नहीं रह सकीं।
तमिल अस्मिता को प्राथमिकता:
अन्नामलाई के मुताबिक, वे तमिलनाडु में जमीनी स्तर पर बदलाव लाना चाहते थे, जिसके लिए उन्हें अब अलग रास्ता चुनना ही सही लगा।
तमिलनाडु में भाजपा को कितना नुकसान?
अन्नामलाई के जाने से तमिलनाडु में भाजपा के समीकरण पूरी तरह प्रभावित हो सकते हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इसके 3 बड़े असर दिख सकते हैं:
सबसे बड़ा चेहरा खोया:
पिछले 4-5 सालों में अन्नामलाई ही तमिलनाडु में भाजपा का मुख्य और सबसे आक्रामक चेहरा थे। फिलहाल पार्टी के पास उनकी टक्कर का लोकप्रिय स्थानीय नेता नहीं है।
युवा वोटर्स छिटकने का डर:
पूर्व आईपीएस अधिकारी होने के नाते युवाओं, सोशल मीडिया और शहरी मध्यम वर्ग में अन्नामलाई की मजबूत पकड़ है। उनके जाने से भाजपा की इस कोर विंग को झटका लग सकता है।
DMK विरोधी वोटों का बिखराव:
अन्नामलाई सत्तारूढ़ DMK के सबसे मुखर आलोचक माने जाते थे। उनके अलग होने से विपक्ष की धार कमजोर हो सकती है।
हालांकि नुकसान सीमित रहने की भी संभावना है, क्योंकि राज्य में भाजपा का एक बड़ा हिस्सा सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट करता है। साथ ही अगर आगामी चुनावों में AIADMK जैसे मजबूत क्षेत्रीय दलों के साथ एनडीए (NDA) गठबंधन बना रहता है, तो सांगठनिक नुकसान को संतुलित किया जा सकता है।
IPS की नौकरी छोड़ राजनीति में आए थे अन्नामलाई
साल 2011 बैच के कर्नाटक कैडर के पूर्व IPS अधिकारी के. अन्नामलाई ने 2019 में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद 25 अगस्त 2020 को वे पीएम मोदी से प्रेरित होकर भाजपा में शामिल हुए थे। पार्टी ने उन्हें तुरंत प्रदेश उपाध्यक्ष और 2021 में महज 3 साल के भीतर तमिलनाडु भाजपा का अध्यक्ष बना दिया था। उन्होंने राज्य भर में 'एन मन्न, एन मक्कल' (मेरी धरती, मेरे लोग) पदयात्रा निकालकर भारी लोकप्रियता बटोरी थी। हालांकि, वे 2021 का विधानसभा (अरवाकुरिची सीट) और 2024 का लोकसभा (कोयंबटूर सीट) चुनाव हार गए थे।
विजय की पार्टी TVK के उभार के बीच नया दांव
अन्नामलाई का यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब तमिलनाडु के हालिया सियासी नतीजों ने सबको चौंका दिया है। हालिया विधानसभा चुनावों में जहां भाजपा को महज 1 सीट से संतोष करना पड़ा, वहीं तमिल सुपरस्टार थलपति विजय की 2 साल पुरानी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) ने रिकॉर्ड 108 सीटें जीतकर DMK (59) और AIADMK (47) जैसे दिग्गजों को पछाड़ दिया है। ऐसे में अन्नामलाई का 2031 को टारगेट कर नई पार्टी बनाना तमिलनाडु की राजनीति को पूरी तरह त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना सकता है।

