शॉर्ट सर्किट से लगी आग, 7 किसानों की 12 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख

सतना के पिपरोखर गांव में शॉर्ट सर्किट से गेहूं के खेतों में आग लग गई, जिससे 12 एकड़ फसल जलकर राख हो गई, किसानों को भारी नुकसान हुआ। किसान मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

शॉर्ट सर्किट से लगी आग, 7 किसानों की 12 एकड़ गेहूं की फसल जलकर राख

सतना: बढ़ते तापमान और तेज हवाओं के बीच सतना जिले में गेहूं के खेतों में आग लगने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मंगलवार को उचेहरा जनपद क्षेत्र के अंतर्गत नागौद थाना क्षेत्र के पिपरोखर गांव में देर शाम एक बड़ी घटना हुई। खेतों के ऊपर से गुजर रही बिजली की तारों में शॉर्ट सर्किट हो गया, जिससे आग की चिंगारियां खेतों में गिर गईं और आग तेजी से फैल गई।

आग की लपटें देखते ही आसपास के खेतों में काम कर रहे ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने आग बुझाने की पूरी कोशिश की, लेकिन तेज हवा और सूखी फसल के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया। आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि किसानों के प्रयासों के बावजूद करीब 12 एकड़ से अधिक गेहूं की फसल पूरी तरह जलकर राख हो गई।

इस घटना में प्रभावित किसान:

  • रामरतन मिश्रा
  • मनीष सिंह
  • संजय तिवारी
  • रामभान तिवारी
  • रामजी मिश्रा
  • कन्हैयालाल मिश्रा
  • रामसेवक वर्मन

ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम भी मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी। किसानों ने बताया कि फसल कटाई के लिए तैयार थी और इस नुकसान से उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई है।



किसानों की मांग:
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से तत्काल मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ है, इसलिए बिजली विभाग को भी जिम्मेदार ठहराया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए।

प्रशासनिक कार्रवाई:
नागौद थाना प्रभारी ने घटना की जानकारी ली और मौके का निरीक्षण किया। फायर ब्रिगेड अधिकारियों ने बताया कि तेज हवा के कारण आग तेजी से फैली। प्रशासन ने किसानों को सहायता पहुंचाने का आश्वासन दिया है।


बढ़ते तापमान का खतरा:
जिले में पिछले कुछ दिनों से तापमान में तेज वृद्धि और लू जैसे हालात बन रहे हैं। ऐसे में खेतों के ऊपर बिजली की तारों की स्थिति पर बिजली विभाग को विशेष ध्यान देने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकी जा सकें। यह घटना एक बार फिर किसानों की फसलों को प्राकृतिक आपदाओं और बुनियादी ढांचे की लापरवाही से होने वाले नुकसान की ओर इशारा करती है।