IIBCA Pre Summit: CM और केंद्रीय मंत्री ने रेस्क्यू व्हीकल्स को दिखाई हरी झंडी, IIFM में डेटा ड्रिवन लैब का हुआ लोकार्पण
Indian Institute of Forest Management में जैव विविधता दिवस कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण पर हुआ मंथन, टाइगर रिजर्व के पास बनेंगे वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर
भोपाल। Indian Institute of Forest Management (IIFM) में शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) प्री-समिट इवेंट का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन याहव और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव शामिल हुए।

इस कार्यक्रम में जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण योजनाओं और पहलों का शुभारंभ भी किया गया।
वन विभाग को मिली नई बाइक और रेस्क्यू ट्रक
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा वन विभाग के लिए 20 नई बाइक और एक रेस्क्यू ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना करने से हुई। इन वाहनों का उपयोग वन क्षेत्रों में निगरानी, वन्यजीव संरक्षण और रेस्क्यू ऑपरेशन में किया जाएगा।

इसके बाद दोनों नेताओं ने IIFM परिसर में लगे विभिन्न राज्यों के जैव विविधता बोर्डों की प्रदर्शनी और स्टॉल्स का अवलोकन किया। यहां जैव विविधता संरक्षण से जुड़े मॉडल, रिपोर्ट्स और तकनीकी पहल को प्रदर्शित किया गया था।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ प्री-समिट का शुभारंभ
आईबीसीए प्री-समिट इवेंट का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस दौरान प्रचार सामग्री, संरक्षण से जुड़ी रिपोर्ट्स और विशेष प्रकाशनों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में 5 रुपए के विशेष डाक टिकट की लॉन्चिंग और नई डेटा ड्रिवन लैब का लोकार्पण भी हुआ।

इसके अलावा ‘इंडियाज बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट 2026’, नागोया प्रोटोकॉल पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट और एबीएस एंड-टू-एंड वेब पोर्टल को भी लॉन्च किया गया। आयोजन के दौरान जैव विविधता संरक्षण पर आधारित कई फिल्मों और डिजिटल प्रस्तुतियों का प्रदर्शन भी किया गया।

टाइगर रिजर्व के पास बनेंगे रेस्क्यू सेंटर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व क्षेत्रों के आसपास वन्यजीव रेस्क्यू सेंटर स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि अभी जंगलों में घायल होने वाले जानवरों को इलाज के लिए भोपाल लाना पड़ता है, जिससे उन्हें परेशानी होती है।

सीएम ने कहा कि स्थानीय स्तर पर रेस्क्यू सेंटर बनने से वन्यजीवों का इलाज तेजी से हो सकेगा और उन्हें उनके प्राकृतिक आवास से दूर नहीं ले जाना पड़ेगा। उन्होंने इसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बताया।
चीता प्रोजेक्ट ने बढ़ाई मध्यप्रदेश की पहचान
मुख्यमंत्री ने Project Cheetah का उल्लेख करते हुए कहा कि शुरुआत में इस परियोजना को लेकर कई तरह की आशंकाएं जताई गई थीं, लेकिन अब इसकी सफलता ने मध्यप्रदेश को देश और दुनिया में नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने नर्मदा नदी में मगरमच्छ संरक्षण का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार ने इस दिशा में भी सफल प्रयास किए हैं।

जल संरक्षण में मध्यप्रदेश बना अग्रणी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में देश में अग्रणी राज्यों में शामिल हो चुका है। उन्होंने बताया कि जन-सहभागिता के जरिए पूरे प्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण, पुनर्जीवन और जल संचयन पर लगातार काम किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान लगातार तीसरे वर्ष चलाया गया है। इस अभियान के तहत करीब 3 हजार करोड़ रुपए की लागत से 56 हजार से अधिक जल स्रोतों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया गया है। इसके अलावा प्रदेश में एक हजार से अधिक अमृत सरोवर बनाए जा रहे हैं और दो लाख से ज्यादा जलदूत तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा दशमी के अवसर पर प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर एक व्यापक महाअभियान भी चलाया जाएगा।
भूपेंद्र यादव ने की मध्यप्रदेश सरकार की तारीफ
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े यूनियन कार्बाइड के कचरे के निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव की सराहना की।उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और चीता संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर काम किया है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में अब तक 94 रामसर साइट्स घोषित हो चुकी हैं और जल्द ही यह संख्या 100 तक पहुंच जाएगी। उन्होंने कहा कि जैव विविधता केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, खाद्य सुरक्षा और आर्थिक व्यवस्था से भी जुड़ी हुई है। भारत की जीडीपी का बड़ा हिस्सा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बायोडायवर्सिटी पर निर्भर है।
‘एक्ट लोकली, थिंक ग्लोबली’ पर जोर
भूपेंद्र यादव ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए समाज, वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और आम लोगों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने ‘एक्ट लोकली, थिंक ग्लोबली’ का संदेश देते हुए कहा कि जैव विविधता समृद्ध होगी तो मानवता भी समृद्ध होगी।

उन्होंने कहा कि धरती का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा स्थायी रिजर्व क्षेत्र के रूप में सुरक्षित होना चाहिए। साथ ही गांव-गांव में समितियां बनाकर स्थानीय लोगों को जैव विविधता संरक्षण से जोड़ने की जरूरत है।
जन-जागरूकता बढ़ाने का प्रयास
कार्यक्रम में इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस के महानिदेशक डॉ. एसपी यादव ने संगठन की गतिविधियों और उद्देश्यों पर प्रस्तुति दी। वहीं मध्यप्रदेश वन विभाग की ओर से भारत में चल रहे चीता पुनर्स्थापन अभियान पर विशेष प्रेजेंटेशन भी प्रस्तुत किया गया।

इस आयोजन का उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना था। कार्यक्रम का आयोजन भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, मध्यप्रदेश शासन, इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस और IIFM द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
Varsha Shrivastava 
