Public Vani Interview : सीधी कांग्रेस अध्यक्ष ज्ञान सिंह की भक्ति और समाजसेवा की मिसाल, 15 साल से निभा रहे राधा-कृष्ण झांकी की परंपरा
Public Vani Interview : जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह का कहना है कि आज वे जो कुछ भी हैं, वह भगवान की कृपा से हैं। इसी विश्वास के कारण धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सहयोग करने से वे पीछे नहीं हटते।
रिपोर्टर दीपक मिश्रा @ सीधी। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह समाजसेवा के साथ धार्मिक गतिविधियों में भी सक्रिय रहते हैं। उनकी श्रद्धा और भक्ति का एक अलग रूप पिछले करीब 15 वर्षों से देखने को मिल रहा है। जन्माष्टमी से तीज तक राधा-कृष्ण की झांकी सजाने की परंपरा उनके परिवार में लगातार निभाई जा रही है। इस दौरान पूजा-अर्चना के साथ विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचकर प्रसाद ग्रहण करते हैं।
माता ने शुरू की थी परंपरा
जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह ने पब्लिक वाणी को बताया कि राधा-कृष्ण की झांकी सजाने की शुरुआत उनकी माता जी ने करीब 15 वर्ष पहले छोटे स्तर पर की थी। उस समय आयोजन सीमित लोगों तक था। धीरे-धीरे लोगों की आस्था और सहयोग बढ़ता गया। आज यह आयोजन बड़े स्तर पर किया जाता है। उनका मानना है कि भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी के आशीर्वाद से इस परंपरा को लगातार आगे बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में भी यह आयोजन जारी रहेगा।

भक्ति के साथ समाजसेवा पर जोर
ज्ञान सिंह की धार्मिक आस्था केवल आयोजन तक सीमित नहीं है। वे विभिन्न धार्मिक स्थलों और मंदिरों में भी अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करते रहे हैं। सीधी जिले में श्रीराम मंदिर के निर्माण कार्य के दौरान भी उन्होंने अपनी ओर से एक लाख रुपये की सहयोग राशि दी थी। इसके अलावा अन्य देवस्थलों और मंदिरों में भी उनके सहयोग की बात सामने आई है। उनका कहना है कि समाज और धर्म से जुड़े कार्यों में योगदान देना उनके लिए सेवा का माध्यम है।
सच्ची श्रद्धा की सेवा में स्वार्थ नहीं होता
जिला अध्यक्ष ज्ञान सिंह का कहना है कि आज वे जो कुछ भी हैं, वह भगवान की कृपा से हैं। इसी विश्वास के कारण धार्मिक और सामाजिक कार्यों में सहयोग करने से वे पीछे नहीं हटते। उनका मानना है कि जब किसी के मन में ईश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा होती है और सेवा में स्वार्थ नहीं होता, तो उसका सकारात्मक फल जरूर मिलता है। वे भगवान श्रीकृष्ण और राधा जी के प्रति अपनी श्रद्धा को जीवनभर बनाए रखने की बात कहते हैं।

