पितृपक्ष 2025: क्या करें और क्या न करें? जानें महत्व और नियम

7 सितंबर से पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है, जो पूर्वजों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। तो इस पितृपक्ष में क्या करें और क्या न करें, आइए जानते हैं।

पितृपक्ष 2025: क्या करें और क्या न करें? जानें महत्व और नियम
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7 सितंबर यानी आज से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है। मान्यता है कि इन 15 दिनों में पितृ अपने परिवार को आशीर्वाद देने के लिए धरती पर आते हैं। पितृपक्ष में कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, नहीं तो आपके पितृ नाराज भी हो सकते हैं।

कुतुप मुहूर्त

पितृपक्ष का कुतुप मुहूर्त सुबह 11:54 से 12:44 तक रहेगा, यह समय श्राद्ध करने के लिए सबसे उपयुक्त है। पितृपक्ष में कोई भी मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश या उद्घाटन नहीं करने चाहिए। इस समय झूठ बोलने और अपशब्दों का प्रयोग करने से पितृ नाराज हो सकते हैं। साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन करना जरुरी माना गया है।

21 सितंबर को पितरों को विदाई दी जाएगी। पितरों का तर्पण करने के लिए एक पीतल या स्टील का बड़ा बर्तन लें, उसमें शुद्ध जल डालें और उसमें थोड़े काले तिल व दूध मिलाकर तर्पण करें। पितरों के तर्पण के लिए दोपहर का समय उत्तम माना जाता है, इसलिए ब्रह्म मुहूर्त में श्राद्ध न करें।

7 सितंबर को चंद्र ग्रहण भी है, लेकिन इसका पितृपक्ष पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

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पितृपक्ष क्यों मनाया जाता है?

पितृपक्ष हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, आभार और सम्मान प्रकट करने का पर्व है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान हमारे पितरों की आत्माएं पृथ्वी लोक पर अपने वंशजों से तर्पण और श्राद्ध की प्रतीक्षा में आती हैं। जब उनके नाम से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किए जाते हैं, तो वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। हर अल पितृपक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है।