युमनाम खेमचंद सिंह होंगे मणिपुर के नए मुख्यमंत्री, राष्ट्रपति शासन के बाद सरकार का गठन
बीजेपी आज मणिपुर में सरकार बनाने का दावा पेश करने जा रही है। पार्टी ने युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना है और वही राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे।
इंफाल: करीब एक साल तक राष्ट्रपति शासन रहने के बाद बीजेपी दोबारा मणिपुर में सरकार बना रही है। बीजेपी आज, 4 फरवरी को मणिपुर में सरकार बनाने का दावा पेश करने जा रही है। पार्टी ने युमनाम खेमचंद सिंह को विधायक दल का नेता चुना है और वही राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे। यह फैसला दिल्ली में हुई मणिपुर के बीजेपी विधायकों की बैठक में लिया गया, जिसमें सहयोगी दल नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) और नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के विधायक भी शामिल थे।
BJP Manipur Legislative Partygi oiba meepham ama Bharatiya Janata Party (BJP) HQ-da, observer Hon'ble National GS Shri @tarunchughbjp ji , NE Statesinggi coordinator Hon'ble Dr. @sambitswaraj , State President Smt @AShardaDevi yaona pangthoktuna Hon'ble Shri @YKhemchandSingh… pic.twitter.com/K724ZPlRsi
— BJP Manipur (@BJP4Manipur) February 3, 2026
नए मुख्यमंत्री उम्मीदवार खेमचंद सिंह पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के मुखर आलोचक रहे हैं। पार्टी का यह फैसला अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि मई 2023 में शुरू हुई मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा से जुड़ी है। इस हिंसा के बाद बीरेन सिंह की राजनीतिक स्थिति लगातार कमजोर होती चली गई और यह तर्क मजबूत हुआ कि राष्ट्रपति शासन से कुछ हद तक व्यवस्था तो संभली, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकला।
हिंसा शुरू होते ही कुकी समूहों ने बीरेन सिंह पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की थी। समय के साथ यह असंतोष बीजेपी के भीतर भी दिखाई देने लगा। जैसे-जैसे हालात बिगड़ते गए, पार्टी के अलग-अलग समुदायों से आने वाले कई विधायक इस नतीजे पर पहुंचे कि बीरेन सिंह अब राज्य को संभालने की स्थिति में नहीं हैं।
2024 के अंत तक पार्टी के अंदर का विरोध खुलकर सामने आ गया। 18 अक्टूबर 2024 को बीजेपी के 19 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर बीरेन सिंह को हटाने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि जनता सरकार की शांति बहाल करने की क्षमता पर सवाल उठा रही है और कहा कि बातचीत और सुलह के बिना संकट का समाधान संभव नहीं है। उसी साल नवंबर में खेमचंद सिंह ने भी कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के बीच इस्तीफा न देने पर बीरेन सिंह की सार्वजनिक रूप से आलोचना की थी।
नवंबर 2024 में बीरेन सिंह पर दबाव और बढ़ गया, जब एनडीए की सहयोगी एनपीपी ने सरकार द्वारा सामान्य स्थिति बहाल न कर पाने और निर्दोष लोगों की मौतों का हवाला देते हुए समर्थन वापस ले लिया। हालांकि विधानसभा में बीजेपी के पास कागजी बहुमत बना रहा, लेकिन जमीनी समर्थन कमजोर पड़ने के संकेत साफ थे। इस दौरान मंत्रियों और विधायकों के घरों पर हमले भी जनता के गुस्से को दर्शा रहे थे।
बीजेपी के असंतुष्ट विधायक कई दिनों तक दिल्ली में डटे रहे और केंद्रीय नेतृत्व को यह संदेश देते रहे कि बीरेन सिंह पार्टी के अधिकांश विधायकों का भरोसा खो चुके हैं। उन्होंने यहां तक चेतावनी दी कि बदलाव न होने पर वे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन कर सकते हैं।
आखिरकार फरवरी 2025 में हालात निर्णायक मोड़ पर पहुंचे। कांग्रेस के संभावित अविश्वास प्रस्ताव और बीजेपी के बागी विधायकों के क्रॉस-वोटिंग के संकेतों के बीच बीरेन सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दे दिया। इससे पहले 3 फरवरी को तत्कालीन मंत्री खेमचंद सिंह ने दिल्ली जाकर पार्टी नेतृत्व को आगाह किया था कि मुख्यमंत्री नहीं बदले गए तो सरकार गिर सकती है। 4 फरवरी को राज्यपाल अजय भल्ला ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य की स्थिति से उन्हें अवगत कराया।
pushpendra 
