कैसे अमित शाह, ललन सिंह और संजय झा ने 7 दिनों में नीतीश को मनाया
अमित शाह को बताया- सरकार अफसर चला रहे; ललन-संजय ने प्लान फाइनल किया,अधिकारियों का वर्चस्व, स्वास्थ्य सवाल और बेटे निशांत की राजनीति पढे़ं पूरी खबर
नीतीश कुमार ने 5 मार्च 2026 को बिहार विधानसभा में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया, जिससे बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव की अटकलें तेज हो गईं। भाजपा नेताओं ने अमित शाह को नीतीश की कमजोरियों से अवगत कराया और 7 दिनों में ललन सिंह व संजय झा ने रणनीति तैयार की।
योजना की शुरुआत:
अमित शाह

के 25 फरवरी 2026 को किशनगंज दौरे पर भाजपा टॉप नेताओं ने गुप्त बैठक की, जहां बताया कि सरकार अधिकारी चला रहे हैं। शाह ने सीमांचल में नीतीश के एग्जिट प्लान पर चर्चा की। इसके बाद दिल्ली में JDU नेताओं संजय झा व ललन सिंह से 4 दौर की मीटिंग हुई।
नीतीश को मनाने की रणनीति:
संजय झा ने हर मीटिंग के बाद नीतीश को जानकारी दी, जबकि ललन सिंह ने परिवार के दबाव के बावजूद मनाया। होली से पहले नीतीश राजी हुए, लेकिन परिवार की वजह से प्लान रुका, नामांकन पूर्व रात मंथन के बाद X पर ऐलान किया। नामांकन में शाह, सम्राट चौधरी जैसे नेता मौजूद रहे।
CM पद छोड़ने के कारण:
अधिकारियों का वर्चस्व, नीतीश नाममात्र के CM थे; अधिकारी उनकी सारी गतिविधियां तय करते, मंत्रियों को अनदेखा करते। NEET छात्रा रेप-हत्या जैसे मामलों में सरकार बैकफुट पर रही।
स्वास्थ्य व छवि पर सवाल:
विधानसभा में राबड़ी देवी को 'लड़की' कहना, ताली बजाने की सलाह जैसी हरकतों से किरकिरी हुई। तेजस्वी यादव ने 'अचेत CM' कहा; सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रखा गया।

बेटे निशांत की राजनीति:
नीतीश परिवारवाद के खिलाफ थे, लेकिन CM रहते निशांत की लॉन्चिंग असंभव। पद छोड़ने से JDU एकजुट रहेगी और BJP निशांत को डिप्टी CM बना सकती है।

भविष्य की तस्वीर:
नीतीश राज्यसभा जाकर केंद्र की ओर रुख करेंगे, नई सरकार में JDU को प्रमुख मंत्रालय मिल सकते हैं। भाजपा का लंबे समय का लक्ष्य बिहार में अपना CM बनाने का लगता है। यह बदलाव शपथ ग्रहण के 105 दिनों में आया, जो नीतीश की 'कमजोर नस' दबाए जाने का संकेत देता है।

