नाग पंचमी पर इंदौर के 200 साल पुराने नाग मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

नाग देवता के दर्शन को उमड़े श्रद्धालु, सुबह से लगी लंबी कतारें स्वर्ण वरक से सजी शेषनाग-वासुकी की जोड़ी, नाग मंदिर में लगा मेला

नाग पंचमी के पावन पर्व पर इंदौर के कृषि कॉलेज रोड स्थित करीब दो सौ साल पुराने प्राचीन नाग मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं और लोग नाग देवता के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।

इस दौरान मंदिर में विशेष आरती और अभिषेक का आयोजन होता है। मान्यता है कि यहां नाग देवता की पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और सर्पदोष से मुक्ति मिलती है। पर्व को लेकर मंदिर के आसपास मेले जैसा माहौल रहता है।

200 साल पुराना नाग मंदिर

इंदौर शहर के कृषि कॉलेज रोड क्षेत्र में स्थित प्राचीन नाग मंदिर नाग पंचमी के अवसर पर आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह स्थान करीब 200 साल पुराना माना जाता है।

मंदिर में नाग देवता की पूजा की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और श्रद्धालुओं के बीच इसे विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। स्थानीय पुजारी और श्रद्धालु यहां समय समय पर साक्षात नाग-नागिन के दर्शन होने की मान्यता भी बताते हैं। वही नाग पंचमी के दिन मंदिर में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है।

नाग देवता का जल और दूध से अभिषेक

भगवान नाग देवता का जल और दूध से अभिषेक किया जाता है और मंदिर में विशेष फूल बंगले का श्रृंगार किया गया और शेष नाग और वासुकी नाग के जोड़ी की प्रतिमाओं का स्वर्ण वरक से श्रृंगारित किया गया। मंदिर में अल सुबह विधिविधान से पूजन के बाद श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि, संतान की खुशहाली और सर्पदोष से मुक्ति की कामना करने पहुंच रहे हैं।

नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा और दूध अर्पित करने की परंपरा देशभर में प्रचलित है। इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि ब्रिटिश काल में एक अंग्रेज अफसर द्वारा मंदिर को हटाया गया था जिसके बाद करीब पचास से ज्यादा नाग वाहन इकट्ठा हो गए जिसके बाद क्षेत्र के रहवासियों के पूजन अर्चन के बाद यहां मंदिर बनाया गया जो आज भी यहीं स्थापित है।

नागपंचमी पर्व के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में मेला भी लगता है। वही आज सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगती हैं। विशेष आरती के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से सराबोर हो जाता है। दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालु भी नाग देवता के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हैं।