शैक्षणिक भूमि के अवैध हस्तांतरण का मामला: EOW ने जीशान अली सहित कई लोगों पर दर्ज किया केस
भोपाल में शैक्षणिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में EOW ने मामला दर्ज किया।
भोपाल में शैक्षणिक उपयोग के लिए आरक्षित भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने बड़ा मामला दर्ज किया है। इस मामले में जीशान अली सहित कई लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। आरोप है कि सहकारी समितियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के माध्यम से शैक्षणिक उद्देश्य के लिए आरक्षित जमीन को योजनाबद्ध तरीके से निजी नाम पर दर्ज कराया गया।
EOW को मिली शिकायत के आधार पर ग्राम नरेला शंकरी स्थित शैक्षणिक प्रयोजन हेतु आरक्षित भूमि के अवैध हस्तांतरण की जांच की गई। जांच में सामने आया कि खसरा क्रमांक 243 के अंश भाग की लगभग 0.4330 हेक्टेयर यानी करीब 46,600 वर्गफीट भूमि, जो स्वीकृत नक्शे के अनुसार शैक्षणिक उपयोग के लिए आरक्षित थी, उसका अवैध रूप से हस्तांतरण किया गया।
सहकारी समितियों के जरिए किया गया खेल
जांच में पाया गया कि इस जमीन का आवंटन सबसे पहले प्राइम एजुकेशन सोसायटी को किया गया था। उस समय सोसायटी की अध्यक्ष स्वर्गीय निकहत शमीम थीं, जो जीशान अली की माता बताई गई हैं। इसके बाद इस भूमि को प्राइम एजुकेशन सोसायटी से वाटिका गृह निर्माण सहकारी समिति को बेच दिया गया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक यह सहकारी समिति भी आरोपी जीशान अली द्वारा ही स्थापित और नियंत्रित की जा रही थी। आरोप है कि पूरी प्रक्रिया के दौरान भूमि को संस्था के नाम दर्ज कराने के बजाय राजस्व अभिलेखों में जीशान अली के व्यक्तिगत नाम पर दर्ज कराया गया।
झूठे शपथपत्र और फर्जी जानकारी का आरोप
EOW की जांच में यह भी सामने आया कि वाटिका गृह निर्माण सहकारी समिति के पंजीयन के समय जीशान अली ने एक शपथपत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें दावा किया गया कि वह किसी अन्य सहकारी समिति का सदस्य नहीं है। जबकि जांच में पाया गया कि वह पहले से ही नरेला शंकरी गृह निर्माण सहकारी समिति का सदस्य था। इसके अलावा यह भी सामने आया कि जीशान अली पहले से दो अन्य सहकारी समितियों का सदस्य था और उनकी पत्नी नाजनीन अली भी एक अन्य समिति की सदस्य थीं।
सहयोगियों को पद देकर नियंत्रण छिपाने की कोशिश
जांच के दौरान यह भी पता चला कि संस्था के वास्तविक नियंत्रण को छिपाने के लिए जीशान अली ने अपनी कंपनी रॉयल रेसिडेंसी में कार्यरत कर्मचारियों ए.के. तिवारी और रामपाल धौंसले को क्रमशः संस्था का अध्यक्ष बनाया।
EOW के अनुसार सहकारी समिति का उपयोग केवल औपचारिक रूप से किया गया और उसका कोई वास्तविक व्यावसायिक कार्य नहीं हुआ। समिति के ऑडिट रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि समिति का उपयोग केवल जमीन को निजी स्वामित्व में लेने के उद्देश्य से किया गया।
सहकारिता विभाग के अधिकारी पर भी आरोप
मामले में सहकारिता विभाग के तत्कालीन उप पंजीयक आर.के. कातुलकर पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। जांच में पाया गया कि अवैध कार्यों में सहयोग के एवज में जीशान अली द्वारा रॉयल रेसिडेंसी परियोजना में उनके परिजन के नाम पर एक आवासीय भूखंड आवंटित कर उस पर भवन निर्माण कराया गया।
EOW की जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी जीशान अली और उनकी पत्नी नाजनीन अली ने जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया। नोटिस भेजे जाने के बाद ए.के. तिवारी को व्हाट्सएप के माध्यम से लिखित जवाब का मसौदा भेजा गया और बैंक खाते से धनराशि भी भेजी गई।
इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
जांच में मिले तथ्यों के आधार पर जीशान अली, उनकी पत्नी नाजनीन अली, स्व. निकहत शमीम, आर.के. कातुलकर, ए.के. तिवारी, रामपाल धौंसले सहित अन्य व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 61(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(d) सहपठित धारा 13(2) के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी गई है।
EOW का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और आगे और भी तथ्यों के सामने आने की संभावना है।
Varsha Shrivastava 
