भोपाल में सरकारी जमीन का बड़ा फर्जीवाड़ा: स्कूल की जमीन निजी बताकर 3.90 करोड़ में बेची
भोपाल के पेटल नगर में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीन के कथित फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आया है। EOW ने कॉलोनाइजर कंपनी के निदेशक समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरोप है कि स्कूल के लिए आरक्षित 1.2125 एकड़ जमीन को निजी बताकर 3.90 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। जांच में पार्क, सड़क और पानी की सुविधा के लिए आरक्षित जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले भी सामने आए हैं। मामले में EOW की जांच जारी है।
राजधानी भोपाल में सरकारी और सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित जमीन को निजी बताकर बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पेटल नगर कॉलोनी में हुए इस कथित जमीन फर्जीवाड़े की जांच के बाद आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने कॉलोनाइजर कंपनी के निदेशक समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। जांच में करीब पांच करोड़ रुपये की संपत्ति के कथित गलत तरीके से बेचे जाने की बात सामने आई है।
स्कूल के लिए आरक्षित 1.2125 एकड़ जमीन 3.90 करोड़ में बेचने का आरोप
EOW की जांच के अनुसार पेटल नगर कॉलोनी करीब 90 एकड़ जमीन पर विकसित की गई थी। स्वीकृत कॉलोनी नक्शे में स्कूल, पार्क, सड़क, सीवर, नाली और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए जमीन आरक्षित की गई थी।
आरोप है कि कॉलोनाइजर कंपनी के निदेशक अनुज गोवर ने स्कूल के लिए आरक्षित करीब 1.2125 एकड़ जमीन को निजी संपत्ति बताकर 27 नवंबर 2024 को जय प्रताप सिंह यादव और अभिषेक आनंद को 3.90 करोड़ रुपये में बेच दिया।
EOW का कहना है कि सरकारी रिकॉर्ड में यह जमीन स्कूल के लिए आरक्षित थी। इसके बावजूद जमीन का निजी सौदा किया गया।
बुजुर्ग महिला के प्लॉट में भी कथित खेल
जांच के दौरान एक अन्य प्लॉट से जुड़ा मामला भी सामने आया। बताया गया कि वर्ष 1978 में एक बुजुर्ग महिला के नाम प्लॉट दर्ज था, लेकिन उसकी रजिस्ट्री नहीं हुई थी। परिवार ने इस मामले को उपभोक्ता आयोग के सामने उठाया।
आयोग ने कंपनी को ब्याज सहित राशि लौटाने का आदेश दिया था, लेकिन परिवार ने पैसे के बजाय अपना प्लॉट वापस मांगा।
आरोप है कि इसी दौरान कंपनी के निदेशक ने प्लॉट पर दो कथित फर्जी दावेदार खड़े कर सिविल कोर्ट में विवाद खड़ा किया। बाद में उन्हीं दावेदारों से समझौता कर वास्तविक आवंटी को जानकारी दिए बिना प्लॉट मनीष नायक और प्रेमानंद नायक को 1.10 करोड़ रुपये में बेच दिया गया।
पार्क, सड़क और कुएं की जमीन पर भी नजर
EOW की जांच में कॉलोनी की अन्य सार्वजनिक उपयोग की जमीनों को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक कॉलोनी में पानी की सप्लाई के लिए बनाए गए कुएं की जमीन का भी सौदा किया गया।
इसके अलावा पार्क, सड़क, सीवर और नाली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आरक्षित जमीन के कथित दुरुपयोग की भी जांच की जा रही है।
सबसे गंभीर बात यह है कि जिस जमीन को स्कूल के लिए आरक्षित रखा गया था, उस पर व्यावसायिक निर्माण की अनुमति लेने का प्रयास किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
नगर निगम ने पहले ही जताई थी आपत्ति
मामले में नगर निगम भोपाल की भूमिका भी सामने आई है। EOW के मुताबिक कथित सरकारी जमीन के फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आने के बाद नगर निगम ने समाचार पत्रों में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कर आपत्ति दर्ज कराई थी।
शासन स्तर पर हुई समीक्षा बैठक में भी मामले को गंभीर मानते हुए कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे।
पांच आरोपियों पर EOW का शिकंजा
जांच के आधार पर EOW ने कॉलोनाइजर कंपनी के निदेशक अनुज गोवर समेत पांच नामजद आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 61(2), 229(2), 316(5) और 318(2) के तहत अपराध क्रमांक 91/2026 दर्ज किया है।
फिलहाल मामले की विवेचना जारी है। जांच आगे बढ़ने के साथ जमीन के अन्य सौदों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका भी सामने आने की संभावना है।
सरकारी और सार्वजनिक उपयोग की जमीन को निजी संपत्ति बताकर करोड़ों रुपये में बेचने के आरोपों ने भोपाल की कॉलोनियों में जमीन के रिकॉर्ड और स्वीकृत नक्शों की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
Varsha Shrivastava 
