धमतरी में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद : गंगाजल पिलाकर की घर वापसी, फिर हुआ महिला का अंतिम संस्कार

Dhamtari Conversion Controversy : सहमति बनने के बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों ने परिवार के साथ धार्मिक रस्में पूरी कीं। परिवार के सदस्यों के पैर धोए गए और गंगाजल दिया गया।

धमतरी में अंतिम संस्कार को लेकर विवाद : गंगाजल पिलाकर की घर वापसी, फिर हुआ महिला का अंतिम संस्कार

Dhamtari Conversion Controversy : धमतरी। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नवागांव में एक महिला की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। मृतका पियन साहू की गुरुवार को मौत हुई थी। वह तलाकशुदा थी और अपने भाई के साथ रहती थी। परिवार ने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू की, लेकिन ग्रामीणों और समाज के लोगों ने अंतिम संस्कार गांव की परंपरा के अनुसार करने की बात कही। इसे लेकर परिवार और ग्रामीणों के बीच कई घंटे तक बातचीत चली।

परिवार पर धर्म परिवर्तन से जुड़े होने का आरोप

ग्रामीणों और समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि मृतका का परिवार पिछले करीब आठ साल से ईसाई मिशनरी से जुड़ा हुआ था। उनका कहना था कि परिवार गांव और समाज के पारंपरिक कार्यक्रमों में शामिल नहीं होता था।

इसी वजह से अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हुआ। ग्रामीणों ने कहा कि गांव में किसी व्यक्ति की मौत होने पर समाज के लोग मिलकर अंतिम संस्कार की तैयारी करते हैं और परिवार का सहयोग करते हैं।

गांव वालों ने हिंदू नियमों से अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया था।

सरपंच और समाज के लोगों ने की बातचीत

विवाद के बाद गांव के सरपंच, ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष और समाज के प्रमुख लोगों ने परिवार के साथ बैठक की। बैठक में अंतिम संस्कार और परिवार के आगे के सामाजिक संबंधों को लेकर चर्चा हुई। कई घंटे चली बातचीत के बाद परिवार ने समाज के साथ रहने की सहमति जताई। परिवार की ओर से महिला का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार करने पर भी सहमति बनी।

ग्रामीणों ने धर्मांतरित परिवार के सदस्यों के पैर धुलवाए।

परिवार के लोगों को गंगाजल पिलाया गया, तुलसी पत्र खिलाया गया।

पूजा के बाद परिवार को समाज में शामिल करने की प्रक्रिया

सहमति बनने के बाद ग्रामीणों और समाज के लोगों ने परिवार के साथ धार्मिक रस्में पूरी कीं। परिवार के सदस्यों के पैर धोए गए और गंगाजल दिया गया। उन्हें तुलसी पत्र खिलाया गया और तिलक लगाया गया। इसके बाद गांव के मंदिर में पूजा-अर्चना की गई। नारियल फोड़कर प्रसाद बांटा गया। इन रस्मों के बाद महिला का हिंदू रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार किया गया।

अंतिम संस्कार को लेकर गांव में विवाद की स्थिति बनी।

परिवार ने आगे समाज के साथ रहने की बात कही

मृतका के भाई उमेश साहू ने बताया कि उनका परिवार करीब आठ साल से ईसाई मिशनरी से जुड़ा था। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार के समय गांव में विवाद की स्थिति बनी थी। इसके बाद समाज के लोगों के साथ बैठक हुई। बैठक में परिवार ने आगे गांव और समाज के कार्यक्रमों में शामिल होने की बात कही। सहमति बनने के बाद महिला का अंतिम संस्कार सामाजिक और धार्मिक रीति-रिवाज के अनुसार किया गया। यह पूरा मामला सिहावा थाना क्षेत्र का है।