नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला
नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर राज्य स्तरीय कार्यशाला, पुलिस-प्रशासन को दिए गए अहम दिशा-निर्देश
भोपाल: राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य प्रदेशभर में नए आपराधिक कानूनों के बेहतर और एकरूप क्रियान्वयन को सुनिश्चित करना तथा पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को उनके व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना था।
कार्यशाला में वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारियों ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि नए कानूनों का मुख्य उद्देश्य न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, त्वरित और तकनीक आधारित बनाना है।

इस दौरान डिजिटल साक्ष्य, ई-एफआईआर, फोरेंसिक जांच, पीड़ितों के अधिकारों की सुरक्षा तथा समयबद्ध विवेचना जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तृत प्रस्तुति दी। अधिकारियों से कहा गया कि वे नए कानूनों के प्रावधानों का गंभीरता से पालन करें ताकि आम नागरिकों को शीघ्र और प्रभावी न्याय मिल सके।
कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पुलिस अधिकारियों, अभियोजन अधिकारियों एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम के अंत में नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समन्वय, प्रशिक्षण और तकनीकी संसाधनों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया।

कार्यशाला का उद्देश्य इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के माध्यम से पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, फॉरेंसिक और अन्य विभागों के बीच डिजिटल समन्वय को मजबूत बनाना है... कार्यक्रम में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजीव एस. कालगांवकर, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे...इस पहल से अपराध जांच में तेजी आएगी, मामलों के निस्तारण में कम समय लगेगा और नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी एवं सुलभ न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी...यह आधुनिक न्याय व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


