भोपाल में पेड़ों को रसायन से सुखाने का मामला, NGT सख्त
भोपाल में पेड़ों को रसायन डालकर सुखाने, लोअर लेक में बिना उपचार का सीवेज पहुंचने और वेटलैंड क्षेत्र में निर्माण के मामले में NGT ने सख्त निर्देश दिए हैं।
भोपाल। भोपाल की लोअर लेक और उसके आसपास के पर्यावरण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी NGT ने सख्त रुख अपनाया है। 11 अगस्त 2026 को Original Application No. 58/2026 में सुनवाई करते हुए अधिकरण ने पेड़ों को नुकसान पहुंचाने, लोअर लेक में बिना उपचार का सीवेज पहुंचने और वेटलैंड क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों से जुड़े मामलों में संबंधित विभागों को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले में राशिद नूर खान की ओर से अधिवक्ता हरशवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा।
पेड़ों के तनों में छेद, पांच पेड़ सूखे मिले
मामले में शिकायत की गई थी कि लोअर लेक के Full Tank Level यानी FTL से 50 मीटर के दायरे में पेड़ों और ग्रीन बेल्ट को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। आरोप था कि कुछ पेड़ों के तनों में छेद कर उनमें रासायनिक पदार्थ डाले जा रहे हैं, जिससे पेड़ धीरे-धीरे सूख रहे हैं।NGT के निर्देश पर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य वेटलैंड प्राधिकरण और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जुड़े अधिकारियों की संयुक्त समिति ने मौके का निरीक्षण किया। समिति को Professors' Colony के पास एक निजी भूखंड में कुल सात बड़े पेड़ मिले। इनमें पांच पेड़ सूखे और मुरझाए हुए थे, जबकि दो पेड़ हरे और अपेक्षाकृत स्वस्थ थे। समिति ने सभी सात पेड़ों के तनों में ड्रिल किए गए छेद भी पाए। निरीक्षण के दौरान कुछ ऐसे निशान और अवशेष मिले, जिनसे पेड़ों में किसी रासायनिक पदार्थ के इस्तेमाल की संभावना सामने आई।NGT ने इस रिपोर्ट को गंभीरता से लेते हुए भोपाल नगर निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ जरूरी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अगर जांच में पेड़ों को नुकसान पहुंचाने की जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित व्यक्ति या परिसर के मालिक पर Environmental Compensation भी लगाया जाएगा।

लोअर लेक में पहुंच रहा बिना उपचार का पानी
मामले में लोअर लेक में बिना उपचार का सीवेज पहुंचने का मुद्दा भी सामने आया। संयुक्त समिति के निरीक्षण में Banganga Nallah से लोअर लेक की ओर पानी का प्रवाह पाया गया। झील के किनारे कुछ हिस्सों में कचरा भी जमा मिला। नगर निगम ने बताया कि कचरे को झील में जाने से रोकने के लिए screening की व्यवस्था की गई है।रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित क्षेत्र से करीब 8 से 10 MLD wastewater निकल रहा है। इसके उपचार के लिए 10 MLD क्षमता का Sewage Treatment Plant बनाया जाना प्रस्तावित है, जिसके दिसंबर 2027 तक शुरू होने की संभावना बताई गई है।NGT ने इस पर साफ कहा कि भविष्य में STP बनने की योजना होने से अभी बिना उपचार के पानी के बहने की समस्या खत्म नहीं हो जाती। अधिकरण ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नगर निगम के खिलाफ Environmental Compensation की गणना करने के निर्देश दिए हैं। यह क्षतिपूर्ति उल्लंघन की तारीख से लेकर STP शुरू होने या उचित wastewater treatment की व्यवस्था होने तक की अवधि के लिए तय की जानी है।
वेटलैंड क्षेत्र में निर्माण पर भी जांच
मामले में वेटलैंड क्षेत्र में नए निर्माण किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। आवेदक की ओर से निर्माण से जुड़े फोटो अधिकरण के सामने रखे गए थे। NGT ने सभी संबंधित पक्षों को दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।अधिकरण ने State Wetland Authority की भूमिका पर भी सवाल उठाया। प्राधिकरण को हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि भोपाल के Chhota Talab में नगर निगम की गतिविधियों से Wetlands (Conservation and Management) Rules, 2017 का उल्लंघन हुआ है या नहीं।इसके अलावा State Wetland Authority, Environment and Planning Coordination Department और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि को मिलकर दोबारा जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें यह भी देखना होगा कि जिन निर्माणों की शिकायत की गई है, वे नए निर्माण हैं या पुराने और अगर नए हैं तो क्या वे वेटलैंड नियमों का उल्लंघन करते हैं। इसकी रिपोर्ट 30 दिन के भीतर दाखिल करनी होगी।
नगर निगम से मांगी शहर के पानी और सीवेज की पूरी जानकारी
NGT ने भोपाल नगर निगम से शहर की जल और सीवेज व्यवस्था से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी मांगी है। इसमें शहर की कुल आबादी, पानी की जरूरत और उपलब्धता, कुल जल उपयोग, पैदा होने वाले wastewater की मात्रा, उसकी treatment capacity, Chhota Talab और Bada Talab में untreated water पहुंचाने वाले नालों की संख्या और दोनों तालाबों में पहुंच रहे untreated wastewater की मात्रा शामिल है।इसके साथ ही अधिकरण ने नगर निगम से यह भी पूछा है कि पूरे सीवेज को उपचारित करने के लिए नए STP कब तक बनाए जाएंगे और तब तक मौजूदा व्यवस्था से जलस्रोतों में प्रदूषण रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।![]()
28 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
NGT ने सभी संबंधित पक्षों को अपने जवाब तीन सप्ताह में दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, BMC को तकनीकी समस्या के कारण दाखिल नहीं हो सके जवाब को दोबारा जमा करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी। तब तक संबंधित विभागों को जवाब, हलफनामा और जांच रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।इस पूरे मामले में NGT के निर्देशों का फोकस तीन बड़ी बातों पर है, पेड़ों को नुकसान पहुंचाने वालों की जिम्मेदारी तय करना, लोअर लेक में बिना उपचार के सीवेज जाने से होने वाले प्रदूषण की भरपाई तय करना और वेटलैंड क्षेत्र में निर्माण की जांच करना।
Anubhav Dubey 
