टेलीकॉम मंत्री का बयान: Sanchar Saathi ऐप ‘डाउनलोड करो या डिलीट, आपकी मर्जी, नहीं होगी जासूसी
दूरसंचार विभाग के सभी मोबाइल फोन में साइबर सिक्योरिटी एप 'संचार साथी' को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश पर विवाद बढ़ गया है।
नई दिल्ली: दूरसंचार विभाग के सभी मोबाइल फोन में साइबर सिक्योरिटी एप 'संचार साथी' को प्री-इंस्टॉल करने के आदेश पर विवाद बढ़ गया है। विपक्ष ने इसे स्नूपिंग ऐप बताया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा का आरोप है कि सरकार देश को तानाशाही में बदल रही है। यह कदम लोगों की प्राइवेसी पर सीधा हमला है। यह एक जासूसी एप है। सरकार हर नागरिक की निगरानी करना चाहती है। साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्टिंग के लिए सिस्टम जरूरी है, लेकिन सरकार का आदेश लोगों की निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल जैसा है।
‘डाउनलोड करो या डिलीट, आपकी मर्जी
इस मामले में अब केंद्र सरकार ने सफाई दी है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि, ये कंपलसरी नहीं है। चाहे तो यूजर इसे डिलीट कर सकते हैं। सिंधिया ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष कुर्सी पीछे, कुर्सी के नीचे और कुर्सी के लिए मुद्दे ढूंढ रहा है। इसके लिए वह जनता को भ्रमित कर रहा है, लेकिन भ्रम को दूर करना सरकार की जिम्मेदारी है। टेलीकॉम मंत्री कहा कि, 2024 में भारत में 22800 करोड़ रुपये का फ्रॉड हुआ है। इस फॉड को रोकने के लिए सरकार ने संचार साथी ऐप को आम नागरिक को दिया है। जो लोग इस सुविधा का इस्तेमाल करना चाहते हैं, वो करें जो नहीं करना चाहते हैं वह ऐप को डिलीट कर सकते हैं।
स्मार्टफोन कंपनियों को दिया था आदेश
बता दें कि केंद्र सरकार ने एक दिसंबर को स्मार्टफोन कंपनियों को आदेश दिया था कि वे स्मार्टफोन में सरकारी साइबर सेफ्टी एप को पहले से इंस्टॉल करके बेचें। इसके लिए 90 दिन का समय दिया था। इस फैसले का कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने विरोध किया।
कांग्रेस समेत विपक्षी नेताओं ने जताया विरोध
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने भी सरकार के इस आदेश की आलोचना की है। वहीं, कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने मंगलवार को इस मुद्दे पर सदन स्थगन नोटिस भी दिया। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि संचार साथी एप उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसे स्वैच्छिक होना चाहिए, जिसे जरूरत हो, वह खुद इसे डाउनलोड कर सके। किसी भी चीज को लेकर लोकतंत्र में जबरन लागू करना चिंता की बात है।
shivendra 
